राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड बना सफेद हाथी, पांच साल बाद लौटाए जा रहे हैं क्लेम फार्म-भूपेंद्र
हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कामगार बोर्ड का राज्य कार्यालय शिमला से मुख्यमंत्री के ज़िला हमीरपुर के लिए शिफ्ट कर दिया गया है और बोर्ड के नए चेयरमैन पिछले एक साल से जगह जगह जाकर दौरे कर रहे हैं।लेकिन बिडंबना ये है कि बोर्ड में पिछले चार साल के लंबित एक लाख सात हज़ार मज़दूरों की 500 करोड़ की सहायता राशी जारी नहीं हो रही है और उसे जारी न करने के लिए बोर्ड की ओर से नए नए मज़दूर विरोधी फ़रमान चेयरमैन और अधिकारी जारी कर रहे हैं।सीटू से जुड़ी निर्माण मज़दूर फेडरेशन के राज्य अध्य्क्ष भुपेन्द्र सिंह जो वर्तमान में बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य भी हैं उन्होंने इसके लिए बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है और उसके खिलाफ जल्द ही आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।उन्होंने इस विषय पर चर्चा करने के लिए बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखकर समय मांगा है और उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो सीटू से सबंधित यूनियन हमीरपुर में स्थापित हुए बोर्ड दफ्तर पर जल्द ही प्रदर्शन करेगी। भुपेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया कि जिन मजदूरों ने अपने बच्चों की छात्रवृति, विवाह शादी व अन्य प्रसुविधाओँ हेतु वर्ष 2020 में आवेदन जमा किये थे उन्हें अब इस आधार पर वपिस लौटाया जा रहा है कि वे पहले इकेवाईसी करवाएं।इसके अलावा स्कूलों-,कालेजों के मान्यता पत्र जमा करवाने व कुछ अन्य तरह की कई ऐसी आपत्तियां जानबूझकर लगाकर आजकल वापस भेजे जा रहे हैं जो उस समय लागू नहीं थी और कानूनी तौर पर ज़रूरी नहीं है।जबकि बोर्ड में पिछले छह.सात महीने से पचास प्रतिशत पेंडिंग क्लेम जारी करने का निर्णय हो रहा है लेकिन अभी तक दस प्रतिशत मज़दूरों की वित्तिय सहायता भी जारी नहीं हुई है।बोर्ड में फैसला होने के बाबजूद श्रम कल्याण अधिकारियों को क्लेम फ़ार्म हेड क्वाटर न भेजने के आदेश जारी किए गए हैं और वे अब जानबूझकर उन आवेदनों पर पांच साल पहले की वो आपत्तियां लगा रहे हैं जो उस समय नियम ही नहीं था।इकेवाईसी करने का निर्णय गत वर्ष हुआ है लेकिन आपत्ति 2020 के क्लेमों पर लगाई जा रही है।यहीं नहीं इकेवाईसी जो लोकमित्र केंद्रों में हो जाती थी उसे अब बोर्ड कार्यालय में करने का फरमान जारी कर दिया है और अब लम्बी लंबी लाईने इसके लिए लगी है। बोर्ड के अलग अलग कार्यालयों में 51 कर्मचारियों के पद ख़ाली पड़े हैं जिन्हें भरा नहीं जा रहा है और हमीरपुर में तो हेडऑफिस के आधा दर्जन कर्मचारी तैनात कर दिए हैं जिससे हेडऑफिस का काम लगभग बन्द हो गया है।सरकाघाट जहां तीस हजार से ज़्यादा निर्माण मज़दूर पंजीकृत हैं वहां दो साल से मोटीवेटर की पोस्ट खाली पड़ी है।लेकिन बोर्ड के चेयरमैन हररोज़ नई नई राजनीतिक घोषणाएं कर रहे हैं लेकिन मज़दूरों को उनके लीगल अधिकारों व सहायता जारी करने में विफल हो रहे हैं।हालांकि सीटू ने उनका शिमला में जनवरी माह में हुई 47वीं बैठक के दिन उनका सांकेतिक घेराव किया था लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ है इसलिए अब यूनियन हमीरपुर ऑफिस पर विशाल वरोध प्रदर्शन करने वाली है और मज़दूरों के पांच साल से गैर कानूनी तौर पर रोके गए लाभ उन्हें मिल सकें।