टिहरा में चिट्टे के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, पूर्व सैनिकों व महिलाओं ने नशे के विरुद्ध युद्ध का लिया संकल्प
चिट्टे व अन्य नशे के ख़िलाफ़ आज धाड़ता नशा मुक्ति अभियान समिति के बैनर तले राजकीय वरिष्ठ माद्यमिक पाठशाला टिहरा से लेकर बांदल रेस्ट हाउस तक पैदल यात्रा निकाली गई।जिसमें वेटरन इंडिया पूर्व सैनिक संघ, महिला मण्डलों, पँचायत प्रतिनिधियों, समाजिक संगठनों ,साक्षरता एवं ज्ञान विज्ञान समिति व अन्य कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।जागरूकता मार्च का नेतृत्व अंतराष्ट्रीय एथेलेटिक्स कोच भुपिंदर भूप्पी,वेटरन इंडिया के राज्य अध्यक्ष कैप्टन रमेश तपवाल, पूर्व ज़िला पार्षद भुपेन्द्र सिंह,गरयोह के प्रधान बक्शी राम,ज्ञान विज्ञान समिति के ऋत्विक ठाकुर इत्यादि ने किया। दो किलोमीटर के पैदल मार्च के बाद रेस्ट हाउस में आम सभा आयोजित की गई जहां भूपिंदर भूप्पी ने बताया कि नशे की समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है और युवा पीढ़ी इसके जाल में फंसती जा रही है और लगभग तीसरे दिन चिट्टे के सेवन से किसी न किसी युवा की मौत हो रही है।धाड़ता क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है और अभी तक कई युवा इसकी गिरफ़्त में आ गए हैं और मृत्यु भी हो गई है।उन्होंने युवाओं को खेलों में ज़्यादा समय देने की बात कही ताकि वे शारिरिक तौर पर फिट रहें और नशे से दूर रहें।ढगवाणी पुलिस चौकी प्रभारी सुनील कुमार ने कहा कि पुलिस अपनी ओर से पूरी ईमानदारी से चिट्टे के ख़िलाफ़ काम कर रही है लेकिन बिना लोगों के सहयोग से पूर्ण रूप से सफ़लता नहीं मिल सकती है।उन्होंने चिट्टा सप्लाई करने वालों की सूचना दें जिसे गुप्त रखा जाता है।अब सरकार ने इसके बारे में विधानसभा में कड़े कानून बना दिया है जिससे इसे रोकने में मदद मिलेगी।वेटरन इंडिया पूर्व सैनिक संघ के राज्य अध्यक्ष रमेश तपवाल ने कहा कि नशे के विरुद्ध छेड़े गए युद्ध में भी पूर्व सैनिक फाईटर की भूमिका निभाएंगे जिसके लिए उनका संगठन गांव गांव में मोर्चा बन्दी करेंगे ताकि युवाओं और समाज के भविष्य को बचाया जा सके।साक्षरता एवं ज्ञान विज्ञान समिति के संस्थापक तथा पूर्व ज़िला पार्षद भुपेन्द्र सिंह ने जहां एक ओर नशे की सप्लाई बंद करने के लिए सरकार व पुलिस को योजना बना कर त्वरीत कार्यावाई करने की बात कही वहीं उन्होंने नशे का सेवन न करने बारे जागरुकता फैलाने पर ज़्यादा जोर दिया।उन्होंने कहा नशा कई प्रकार से इस्तेमाल किया जाता है लेकिन वर्तमान में केवल चिट्टे व सिंथेटिक नशे की बात ज्यादा हो रही है कियूंकि इसके दुष्परिणाम बहुत ज्यादा हैं लेकिन हमें सभी प्रकार के नशे की समग्रता में भी बात करनी होगी।हमारे यहाँ तो शिवरात्रि, होली से लेकर कई धार्मिक दिवस ऐसे हैं जिन्हें नशा करने के लिए मान्यता प्राप्त त्यौहारों के रूप में मनाया जाता है।इसलिए इन मान्यताओं व प्रथाओं के ख़िलाफ़ भी हमें जागृति लानी होगी।इसके अलावा जिस युवा को सिंथेटिक नशे की आदत लग गई है उसक एक मरीज़ की तरह ईलाज करना होगा न कि उसके साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जाये और उसके लिए सरकार को सभी क्षेत्रों में परामर्श केंद्र स्थापित करने चाहिए और उसके लिए मनोचिकित्सक भी लगाने होंगे।केवल दंडात्मक निर्णयों से ही ये नहीं रुकेगा।गरयोह पँचायत के प्रधान बक्शी राम महिला मंडल की प्रधान कमला देवी, सुमना देवी, किरणा देवी,सुनीता देवी, गीता देवी आदि ने भी अपने विचार रखे और निर्णय लिया गया कि अगले चरण में सभी पंचायतों व गांवों में नशा मुक्ति हेतु निगरानी कमेटियां गठित की जाएंगी जो नशा सप्लाई करने वालों की सूचना पुलिस को दिया करेगी और अपने स्तर पर भी इसकी रोकथाम के लिए गांव गांव में जागरूकता अभियान चलाएगी और पहरा भी देगी। आगामी 18 अप्रैल को नशे के खिलाफ मैराथन दौड़ आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।