एक दशक से स्मार्ट नहीं बन पाया सोलन शहर
हमाचल की फास्टेस्ट ग्रोइंग सिटी सोलन एक दशक से स्मार्ट नहीं बन पाई। सोलन को केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना से जोडऩे के नेताओं ने सार्थक प्रयास नहीं किए। नेताओं की कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण सोलन शहर आज भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है, जबकि वह इस योजना में शामिल होने के लिए सबसे ज्यादा पात्रता रखता है। सोलन न केवल प्रदेश का इंडस्ट्रियल हब है, बल्कि यहां नौ यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज और कई विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान भी हैं। जनसंख्या के लिहाज से भी राजधानी शिमला के बाद प्रदेश में किसी भी शहर से ज्यादा है। सोलन की जनसंख्या करीब 80 हजार से एक लाख तक पहुंच गई है। इस बार भी केंद्रीय बजट में सोलन शहर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करने की पैरवी प्रदेश सरकार और नगर निगम ढंग से नहीं कर पाया। शहर के समीप ही विश्व प्रसिद्ध कसौली पर्यटन स्थल है, जबकि दूसरा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चायल भी यहां से मात्र 45 किलोमीटर की ही दूरी पर है। सोलन सीट से भाजपा के प्रत्याशी रहे डॉ. राजेश शर्मा का कहना है कि सोलन शहर योजना में शामिल होने की पूरी पात्रता रखता है। आने वाले समय में ऐसी योजना में सोलन को शामिल किया जाना चाहिए। नगर परिषद सोलन के पूर्व अध्यक्ष कुल राकेश पंत का कहना है कि 10 साल पूर्व सोलन शहर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करने के दावे की पूरी शिद्दत से पैरवी की गई थी। फिर भी सोलन को योजना में शामिल नहीं हो पाया। मामले पर पुनर्विचार होना चाहिए।
केंद्र सरकार से मिलती है आर्थिक सहायता
केंद्र सरकार देश में 100 अधिक शहरों को स्मार्ट सिटी के तहत विकसित कर रही है। पहले चरण में चयनित शहरों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपए मिले थे। साथ ही पांच साल तक अलग से धनराशि दी जाती है, ताकि शहर का कायाकल्प हो सकता है। इस योजना में अभी तक शिमला और धर्मशाला शहर को चुना गया है। योजना के तहत दोनों शहरों का कायाकल्प किया जा रहा है।