पॉलीथिन के लिफाफों के लगे ढेर
प्रदेशभर में पॉलीथिन के लिफाफों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है और प्रदेश को पूर्णतया पॉलीथिन मुक्त भी घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके जिलेभर में पॉलीथिन का प्रयोग किया जा रहा है और पॉलीथिन के लिफाफों को चुपचाप सड़क के किनारे फेंका जा रहा है। भोटा और झिरालड़ी के बीच जंगल में सड़क किनारे जगह-जगह पॉलीथिन के लिफाफों और अन्य कचरे के ढेर सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं। यही नहीं जिले के अन्य स्थानों में भी पॉलीथिन के लिफाफे प्रयोग में लाए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। गौर रहे कि हिमाचल सरकार ने 2019 में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध लगाया था। बाजारों में पॉलीथिन के बैग और अन्य सामान पर रोक लगाई गई, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। इस विषय के बारे में व्यापार भोटा मंडल के प्रधान सनी ने बताया कि हमने कई बार लोगों को वहां पर प्लास्टिक के लिफाफे फेंकते पकड़ा है, पर कुछ लोग रात के अंधेरे में प्लास्टिक फेंकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वहां पर एक नोटिस बोर्ड लगाया जाए जिससे लोग वहां पर प्लास्टिक नहीं फेंकेंगे, वहीं भोटा चौकी के एसआई मनोज ने बताया कि अगर लोग वहां पर खुले में कूड़ा फेंकते नजर आए तो उनके चालान किए जाएंगे । खाद्य नागरिक पूर्ति अधिकारी शिवराम राही ने कहा कि इस तरह के लोगों पर शिकंजा कसा जाएगा और दुकानों की भी चेकिंग की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में जिला पॉल्यूशन अधिकारी प्रदीप मोदगिल ने बताया इस तरह के लोगों के चालान किए जा रहे हैं और इस विषय के बारे में पंचायत प्रधानों बात करेंगे। बीडीओ से भी मीटिंग में बात हुई है कि इस समस्या का समाधान किया जाए और सख्त कार्रवाई की जाए, बाकी जो सब्जियों की दुकानों में प्लास्टिक के लिफाफे में सब्जी आती है, उनके लिए भी सब्जी मंडियों में हिदायत दी जाएगी कि प्लास्टिक के लिफाफे में सब्जी की पैकिंग न की जाए।
प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल
सरकार ने प्लास्टिक बैन को सख्ती से लागू करने के लिए कई नियम बनाए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दर्शाती है। क्या प्रशासन अपनी ज्मिेदारी निभा रहा है? अगर नियमों का पालन हो रहा होता, तो सड़कों के किनारे इस तरह प्लास्टिक के लिफाफों के ढेर नजर नहीं आते। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्लास्टिक का उत्पादन और बिक्री बंद है, तो यह आखिरकार आ कहां से रहा है। उन्होंने मांग की कि छापेमारी कर ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाए और सड़कों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पॉलीथिन की समस्या और सड़क किनारे लग रहे कूड़े के ढेर की समस्या अंकुश नहीं लगाया तो हिमाचल का प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को कठोर कार्रवाई करनी होगी, तभी पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लग पाएगी।