बाथू की लड़ी में वसूला जा रहा टैक्स और सुविधाएं जीरो
पौंग बांध स्थित पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान स्वर्ग को जाने के लिए निर्मित बाथू दी लड़ी एक ऐतिहासिक स्थल है जहां दूर-दूर से पर्यटक आते है। इसी ऐतिहासिक स्थल का कुछ माह पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू ने दौरा किया था। तब उन्होंने इसे पर्यटक की दृष्टि से विकसित करने की बात कही थी। इस विकसित करना तो दूर, जहां बैठने, शौचालय जैसी सुविधाएं दूर-दूर तक नहीं है ऐसे में विभाग ने जहां पर पर्ची काटने शुरू कर दी है। पर्ची काटने का पर्यटकों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों ने पर्ची काटने पर एतराज जताया है। पर्यटक कपिल शर्मा ने कहा की शौचालय, बैठने जैसी कोई सुविधाएं नही हैं, मगर वन्य प्राणी विभाग ने बाथू दी लड़ी में जाने वाली बस की टिकट 200 रुपए, जबकि बस में बैठी हर सवारी की 10 रुपए पर्ची काटी जा रही है। प्रत्येक कार की 110 रुपए और मोटरसाइकिल की 80 रुपए की व प्रति व्यक्ति 5,10, 20, 50 रुपए चार्ज कर रहा है। पर्यटक प्रैम लता ने सरकार, प्रशासन व वन्य प्राणी विभाग से मांग की है कि पर्यटकों से पर्ची काटना बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इसे विकसित करने की बात की थी मगर विभाग ने विकसित करने की बजाए पर्ची काटने शुरु कर दी है। पर्यटक एवं फतेहपुर निवासी अजय सिंह का कहना है की मंदिर खंडहर बना हुआ है। जिन लोगों को डैम बनने पर वहां से विस्थापित किया गया, उनकी पीड़ा आज भी कोर्ट-कचहरी के चक्करों में फंसी है। विस्थापितों को आज तक न्याय नहीं मिल पाया है, ऊपर से धरोहर जर्जर हालत में है।