चंबा के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की उठाई मांग
चंबा जिले के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चंबा के समृद्ध इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की पुरजोर मांग उठाई है। राष्ट्रीय सनातन धर्म मंच के जिला अध्यक्ष राकेश बिज, जिला सचिव सुधीर कुमार और जिला उपाध्यक्ष सुमन कुमारी सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस विषय पर एकमत होकर चंबा के ऐतिहासिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने ने इस विषय को लेकर माननीय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें चंबा के इतिहास को स्कूली शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने की अपील की गई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि चंबा का इतिहास न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे भारतवर्ष की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धारा को प्रभावित करता रहा है। राजा साहिल वर्मा से लेकर चंबा रियासत के स्वर्णिम युग तक, यह भूमि वीरता, संस्कृति और परंपराओं की मिसाल रही है। लेकिन आज की युवा पीढ़ी अपनी इस समृद्ध विरासत से अनभिज्ञ होती जा रही है। ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया कि स्कूली पाठ्यक्रम में चंबा की स्थापत्य कला, भूरी सिंह संग्रहालय, मिनिएचर पेंटिंग, चंबयाली भाषा, नाटी, रीति-रिवाज और ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी दी जाए। इससे न केवल विद्यार्थियों में स्थानीय गौरव और आत्मसम्मान की भावना विकसित होगी, बल्कि वे अपनी जड़ों को पहचानकर भविष्य को सशक्त बनाने में भी सक्षम होंगे। साथ ही, हर स्कूल और गांव के पुस्तकालय में रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद जैसी ग्रंथों के सारांश उपलब्ध कराने की भी मांग की गई, ताकि बच्चे अपने धर्म और इतिहास से परिचित हो सकें।