जिला मुख्यालय आयुर्वेदिक अस्पताल में लैब सुविधा बंद
जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों को लैब सुविधा के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के लैब टेक्नीशियन 31 दिसंबर, 2024 को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके बाद से अस्पताल में ब्लड, यूरिन और अन्य जरूरी टेस्ट बंद हो गए हैं। नए साल के दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अब तक लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसके कारण मरीजों को निजी लैब में टेस्ट करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। डॉक्टरों द्वारा लिखे गए टेस्ट अब अस्पताल में नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मरीजों को बाहर जाकर महंगे दरों पर निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है। खासतौर पर गरीब मरीजों पर इसका भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि उन्हें अस्पताल में इलाज के साथ-साथ जरूरी जांच की सुविधा मिलनी चाहिए। अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से गुहार लगाई है कि आयुर्वेदिक अस्पताल में लिखे जाने वाले टेस्ट को मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लैब में करवाने की अनुमति दी जाए। इससे मरीजों को राहत मिल सकेगी और उन्हें निजी लैब में अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल के मेडिकल स्टूडेंट दिलीप ठाकुर ने बताया कि लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति के लिए पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही अस्पताल में नया लैब टेक्नीशियन नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद मरीजों को अस्पताल में ही टेस्ट की सुविधा मिलने लगेगी।
मरीजों में नाराजगी बढ़ी
लैब सुविधा बंद होने और महिलाओं के लिए पंचकर्म सुविधा न होने से मरीजों में गहरी नाराजगी है। मरीजों का कहना है कि आयुर्वेदिक अस्पताल पहले ही सीमित संसाधनों के साथ चल रहा है, ऐसे में लैब सुविधा का ठप होना इलाज की गुणवत्ता को और प्रभावित कर रहा है।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हों
स्थानीय लोगों और मरीजों ने प्रशासन से अपील की है कि अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति और महिलाओं के लिए पंचकर्म की सुविधा जल्द शुरू की जाए, ताकि मरीजों को कुशल और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।