हिमाचल में सूखे जैसे हालात, टूरिस्ट मायूस
हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। प्रदेश में गेहूं सहित रबी की फसल सिंचित क्षेत्रों को छोड़कर बर्बाद हो चुकी है। सेब बहुल क्षेत्रों में बागवानों के सामने सेब के पौधों को सूखने से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सेब सहित अन्य फलदार पौधों को बचाने के लिए खरीदकर पानी बगीचों में पहुंचाया जा रहा है। सेब के पौधों के नीचे पानी डालने का काम किया जा रहा है। सचिवालय में साप्ताहिक समीक्षा बैठक में पेयजल स्थिति पर आधिकारिक स्तर पर चर्चा होती है। मौसम विभाग के अनुसार, एक जनवरी से 11 फरवरी तक सामान्य रूप से 117.9 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 29.4 मिमी ही बारिश और बर्फबारी दर्ज हुई है। इसका सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ा है, क्योंकि बर्फबारी के अभाव में टूरिस्ट निराश लौट रहे हैं। प्रदेश में पिछले साल मानसून सीजन में सामान्य से 19त्न कम बारिश हुई थी। इसके बाद पोस्ट- मानसून सीजन में भी 98 प्रतिशत कम वर्षा हुई और अब विंटर सीजन में भी हालात बिगड़ रहे हैं। जल शक्ति विभाग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में अवगत करवा दिया गया है कि पेयजल परियोजनाओं में पानी का स्तर घटता जा रहा है। प्रदेश के एकमात्र कुल्लू जिला में वर्षा के जल स्तर की बात की जाए तो गिरावट-16 प्रतिशत है, जो कि प्रदेश के अन्य 11 जिलों में सबसे कम प्रतिशतता है।
बर्फबारी न होने के कारण बने सूखे जैसे हालात
कुल्लू जिले को छोड़ दें तो अन्य जिले तेजी से सूखाग्रस्त होने की स्थिति की ओर भाग रहे हैं। मौसम विभाग की ओर से ये कहा जा रहा है कि प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा और हिमपात होने के कारण सूखे जैसे हालात बनते जा रहे हैं। इसके पीछे प्रमाण दिया गया है कि मानसून के बाद के पांच महीनों में कहीं पर भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। सचिवालय में साप्ताहिक समीक्षा बैठक में पेयजल परियोजनाओं में घटता जलस्तर बेचैनी पैदा कर रहा है।
मानसून के बाद पांच महीने निकले सूखे
मानसून के बाद पांच महीनों के दौरान प्रदेश में पर्याप्त वर्षा और हिमपात नहीं हुआ है। प्रदेश में वर्षा सामान्य से बहुत कम हो रही है। अक्तूबर में 97 प्रतिशत, नवंबर में 99 प्रतिशत, दिसंबर में 23 प्रतिशत, जनवरी में 98 प्रतिशत और फरवरी में 56 प्रतिशत कमी चल रही है। हर कोई आसमान की तरफ निहार रहा है कि कब बादल आएं और सूखी धरती और पहाड़ बर्फ से लकदक हों। हालात यह हैं कि एक-एक दिन कर तीन माह का समय व्यतीत हो चुका है और वर्षा के आसार नहीं हैं। इसका व्यापक स्तर पर असर हो रहा है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी सूखे से राहत न मिलने का अनुमान लगाया है और मौसम के साफ रहने की संभावना जताई है।