दुनिया भारतीय संस्कृति की कायल
महाराष्ट्र के पूणे शहर में कथूर स्थित महाराष्ट्र प्रोद्योगिकी संस्थान विश्व शांति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 14वें अखिल भारतीय छात्र सम्मेलन के तीसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने कहा कि पूरा विश्व आज भारतीय संस्कृति का कायल है। भारतीय संस्कृति एवं परिधान की विश्व के अलग-अलग देशों में आज भी अपनी पहचान है। उन्होंने कहा कि हम पहले भारतीय हैं उसके बाद किसी प्रदेश के वासी हैं और हमें भारतवासी होने का गर्व होना चाहिए। यह देश स्वतंत्रता सेनानियों का देश है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इसे अंग्रेजों की बेडिय़ों से मुक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें हिमाचली होने का भी गर्व है, जिसकी अपनी अलग से पहचान है। हिमाचल देवभूमि है, रणबांकुरों की भूमि है तथा तपस्या व त्याग की भूमि है। आज भी हम 'अतिथि देवो भव:' संस्कृति को अपनाए हुए हैं अर्थात हम अपने अतिथियों को आज भी देव स्वरूप मानते हैं। चंबा का रूमाल हिमाचली टोपी व शॉल आज भी दुनिया के उत्कृष्ट परिधानों में शूमार हैं। हमारा प्रदेश आज भी अपनी पुरातन संस्कृति जो हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है उसे संजोए हुए हैं। चंबा का मिंजर मेला, मंडी की महाशिवरात्रि तथा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा इसके जीवंत उदाहरण हैं। यह उदगार पठानिया ने 14वें भारतीय छात्र संसद के तीसरे दिन के सत्र के लिए चयनित विषय 'भारतीय संस्कृति या पश्चिमी गलैमर, भारतीय युवाओं की द्वंद्व' के ऊपर बोलते हुए प्रकट किए। सम्मेलन को रामायण सीरियल में प्रभु राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल, केंद्रिय नागरिक एवं उड्डयन मंत्री किंजारप्पा राममोहन नायडू, फिल्म अदाकारा खशबू तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी संबोधित किया। सम्मेलन मे देश के विभिन्न राज्यों से आए दस हजार छात्र मौजूद थे। पठानियां ने कहा राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेते हुए उन्हें कई देशों का दौरा करने का मौका मिला है। आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड तथा दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पठानिया ने कहा कि पश्चिमी देशों के लोग आज रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं तथा गीता उपदेशों का अनुकरण कर रहे हैं यह भारतीय संस्कृति के विश्व में विद्यमान होने का उपयुक्त उदाहरण है। इससे पूर्व सम्मेलन के आयोजकों द्वारा पठानिया का शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर पठानिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस से मुलाकात कर भारतीय छात्र संसद तथा राष्ट्रीय विधायक सम्मेलन की महतता पर चर्चा की। एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ करड़ से भी शिष्टाचार भेंट की। कार्यक्रम के प्रर्वतक तथा एमआईटी वल्र्ड पीस युनिवर्सिटी के अध्यक्ष राहुल करड़ के विशेष आग्रह पर पठानिया ने सभी समिति बैठकों को अलग-अलग समिति कक्ष में जाकर संबोधित किया। पठानिया ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता तथा मशीन लर्निंग सिर्फ भविष्य की अवधारणाएं नहीं हैं, यह तकनीक प्रगति का वर्तमान और भविष्य है।