डलहौजी के ज्यादातर होटल बिना पार्किंग
बीते एक दशक से डलहौजी एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में छोटेबड़े होटलों, रिजॉर्ट, गेस्ट हाउसों एवं रेस्टोरेंट्स की मानों बाढ़ सी आ गई हो। हर गली, हर कूचे में छोटाबड़ा होटल एवं गेस्ट हाउस देखने को मिल ही जाएगा। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र के ज्यादातर होटलरिजॉर्ट, गेस्ट हाउसों के पास अपनी खुद की पार्किंग व्यवस्था भी नहीं है। ज्यादातर गाडिय़ां होटलों, गेस्ट हाउस एवं रिजॉर्ट्स के बाहर ही खड़ी देखने को मिलेंगी। अब सवाल यह पैदा होता है कि अगर इनके पास पार्किंग व्यवस्था नहीं है तो इन्हें पंजीकृत कर लाइसेंस कैसे पर्यटन विभाग द्वारा दे दिए जाते हैं। क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या जो है, वह पार्किंग ही है, जिसने पुलिस प्रशासन व स्थानीय प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। सर्दियों के सीजन में जिस तरह से कम बारिश हो रही है, उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार गर्मियों में डलहौजी व चंबा में पर्यटन उद्योग पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगा। इसी के मद्देनजर उपमंडल अधिकारी डलहौजी ने पिछले साल स्थानीय होटल कारोबारी, टैक्सी ऑपरेटर एवं अन्य निजी संस्थाओं के साथ मिलकर एक बैठक का आयोजन किया, जसमें पार्किंग जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा की गई। बता दें कि हर साल गर्मियों के सीजन में बाहरी पर्यटकों को अपनी गाडिय़ां पार्क करने के लिए कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ता है क्योंकि क्षेत्र के ज्यादातर छोटेबड़े होटलों के पास खुद की पार्किंग है ही नहीं और जो पार्किंग है, वह बाहरी वाहनों को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए क्षेत्र में गाडिय़ां जो हैं, वे आड़ी टेडी सड़क के दोनों ओर खड़ी नजर आती हैं। क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने तो पक्के तौर पर ही अपनी पार्किंग स्थल बना ली है, जहां पर कोई अन्य और गाड़ी खड़ी कर दे तो झगड़ा और मारपीट जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
लोग परेशान
पार्किंग की समस्या को लेकर जहां स्थानीय लोग परेशान हैं तो वहीं स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन भी अच्छा खासा चिंता में नजर आता है। इस समस्या को लेकर गत वर्ष कांग्रेस युवा नेता एवं कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने चंबा दौरे के दौरान पार्किंग की समस्या को लेकर डलहौजी वासियों को आश्वास्त किया था कि शिमला की तरह डलहौजी में भी पार्किंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि स्थानीय जनता एवं बाहरी पर्यटकों को थोड़ी राहत मिल सके, लेकिन अभी तक इस बारे में किसी तरह का कोई काम होता नजर नहीं आया है।