लोग आज एक-दूसरे को दूब देकर लेंगे आशीर्वाद
कुल्लू जिले में सोमवार को लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जिले के हर गांव व शहर में लोहड़ी के लिए दुकानें सजी रही, गली- मोहल्ले लोहड़ी के गीतों से गूंजते रहे। वहीं मंगलवार को मकर संक्रांति के साथ माघ मास का आगमन होगा। मकर संक्रांति को मनाने के लिए लोगों ने जहां तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, घाटी के मंदिर भी दुल्हन की तरह सज गए हैं। मकर संक्रांति के दिन जिले के लोग एक-दूसरे को जौ की दूब भेंट करेंगे। इस दिन लोग अपने देवालयों में पूजा-अर्चना के बाद बुजुर्गों से आशीर्वाद ग्रहण करेंगे। जिले के कुछ मंदिरों में देवी-देवता स्वर्ग प्रवास से संक्रांति की शुभ बेला में अपने-अपने देवालयों में लौटेंगे। कुछेक घाटी के देवता मकर संक्रांति के दिन अपने देवालयों में लौटेंगे, जबकि कुछ फाल्गुन की संक्रांति को अपने देवालयों में लौटते हैं। मकर संक्रांति के दिन जिला कुल्लू के विभिन्न तीर्थ स्थलों वशिष्ठ, मणिकर्ण, ब्यास-पार्वती संगम स्थल जिया भुंतर, सरयोलसर सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों में श्रद्धालु संक्रांति का स्नान करेंगे। इसके अलावा संक्रांति की शाम को जगह-जगह अंगीठा जला और पूजा-अर्चना के बाद लोहड़ी पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। लोग घरों पर तंदूर और हीटर के पास बैठकर मूंगफली, गज्जक, रेवड़ी का स्वाद लेना नहीं भूले। कुल्लू में मूंगफली 100 से लेकर 130 रुपए किलो, गज्ज्क पैकेट 50 से 150 रुपए किलो तक बिक रही है। रेवड़ी 200 ग्राम 40 रुपए, देसी घी 700 रुपए किलो तक बिक रहा है।
पारंपरिक व्यंजनों से महकेगी घाटी
मकर संक्रांति के अवसर पर लोक व्यंजनों का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति में लोक व्यंजनों जैसे सिड्डू, चिलडे तथा मोड़ी का विशेष स्थान होता है। जिले के कई स्थानों में मकर संक्रांति मनाने की अलग ही परंपरा है। लोग मकर संक्रांति के दिन सुबह चार बजे उठते हैं और गांव के आंगन में एकत्र होकर ढोल-नगाड़ों के साथ प्राकृतिक जल स्रोत तक अंधेरे में मशालों के साथ जाते हैं और वहां पर प्राकृतिक जल स्रोतों में संक्रांति का स्नान करते हैं।
आज स्वर्ग से वापस लौटेंगे देवी-देवता
पोष संक्रांति को स्वर्ग प्रवास पर गए जिले के सैकड़ों देवी-देवता माघ संक्रांति को अपने देवालय लौटेंगे। वहीं कई देवता के फाल्गुन व कुछ एक के शिवरात्रि के दिन दर्शन देंगे, लेकिन अधिकतर देवी-देवताओं के कपाट मकर संक्रांति को खुल जाएंगे। देव परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति की सुबह वाद्ययंत्रों की थाप के साथ पूजा-अर्चना होगी और देवता के गूर भविष्यवाणी करेंगे। करीब एक महीने तक घाटी के देवी-देवताओं के कपाट बंद रहने के बाद देव समाज में खुशी की लहर है। देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास से लौटने के बाद जिले के देवालयों में जहां फिर से रौनक लौट आएगी। वहीं, देव कारज भी शुरू हो सकेंगे।