तिउण गांव में मां फुंगणी नहीं होने देती रासायनिक खेती
कुल्लू जिले का तिउण गांव बेशक मूलभूत सुविधाओं से अछूता है, लेकिन यहां के लोग जैविक खेती को लेकर काफी जागरूक हैं। जी हां, आधुनिक दौर में जहां फसलें उगाने के लिए ज्यादातर लोग रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं, तो वहीं लगघाटी के तिउण गांव के बाशिंदों को देव नियम ही सर्वोपरि हैं। यहां आज भी मां फुंगणी के आदेश पर प्राचीन परंपरा के अनुसार सदियों से सिर्फ जैविक खेती ही होती है। गांव में गोबर के सिवाय रासायनिक खादों पर पाबंदी है। गांव में देव आदेश के आदेशानुसार, करीब 200 बीघा से अधिक भूमि पर रासायनिक खेती वर्जित है। कुल्लू से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी के बाद यहां पर दो घंटे पैदल चलकर इस गांव तक पहुंचा जा सकता है। मानगढ़ पंचायत के उपप्रधान ख्याल ठाकुर का कहना कि मां फुंगणी के आदेशों के चलते आज तक यहां पर 200 बीघा से अधिक भूमि में रासायनिक खादों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसके अलावा माता के दोघरी में भी करीब 50 बीघा से अधिक भूमि पर जैविक खेती ही की जाती है। घाटी में देव आदेश को सर्वोपरी माना जाता है। घाटी के खुशहाल राठौर, देवेंद्र व प्रेम ठाकुर आदि लोगों का कहना है कि तिउण में कई बीघा भूमि पर देव आदेश के चलते सदियों से जैविक खेती ही होती आ रही है।