कुल्लू में पेंशनर भवन की सुविधा न होने से पेश आ रही दिक्कत
हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेशाध्यक्ष एलआर गुलशन की अध्यक्षता में डीसी कुल्लू तोरुल एस रवीश से उनके चैंबर में मिला। इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय कुल्लू में पेंशनर भवन का निर्माण करने के लिए दस बिस्वा भूमि आवंटित करने के लिए मांगपत्र सौंपा। एलआर गुलशन ने बताया कि कुल्लू में पेंशनर्स की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करने के लिए पेंशनर भवन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे बाह्य सराज के आनी, निरमंड सहित बंजार, सैंज, भुंतर, कुल्लू शहर और नग्गर/ मनाली जैसे दूर दराज के क्षेत्रों से कुल्लू मुख्यालय में बैठक में आने वाले पेंशनभोगियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने हैरानी जताई कि कुल्लू में अनेक तथाकथित समानांतर पेंशनर संगठन सक्रिय हैं, लेकिन किसी भी पेंशनर संगठन ने आज तक इस जायज मांग की ओर ध्यान नहीं दिया। पेंशनर्स को पेश आ रही समस्याओं पर चर्चा के लिए मंदिर की सरायों, होटलों, महिला मंडलों, सामुदायिक भवनों और यहां तक कि खुले आसमान के नीचे ढालपुर मैदान में बैठक करनी पड़ती है। डीसी ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गौर से सुना और जिला मुख्यालय में पेंशनर्स की सुविधा के लिए पेंशनर भवन के निर्माण के लिए उपयुक्त जगह तलाशने का आश्वासन दिया। इस दौरान जिला कुल्लू पेंशनभोगी संघ के अध्यक्ष दयाल सिंह ठाकुर, महासचिव किरण चंद शर्मा, भुंतर खंड के अध्यक्ष ओंकार शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं भुंतर खंड के महासचिव खुशाल चंद नेगी, उपाध्यक्ष भागचंद ठाकुर, रवींद्र भार्गव आदि मौजूद रहे।
उपचारधीन पेंशनर्स के तीमारदारों के ठहरने की हो व्यवस्था
जनजातीय क्षेत्र पांगी, किलाड़, लाहौल-स्पीति तथा मंडी सराज के दूरदराज के क्षेत्रों से अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू आने वाले वयोवृद्ध पेंशनर्स और कुल्लू अस्पताल में दाखिल पेंशनर्स के तीमारदारों के ठहरने की सुविधा भी नहीं है, जिससे उन्हें प्राइवेट होटलों में ठहरने के लिए भारीभरकम खर्च उठाना पड़ता है।
दक्कतों का करना पड़ता है सामना
प्रदेशाध्यक्ष एलआर गुलशन ने बताया कि शिक्षकों के लिए जिला मुख्यालय सरवरी में टीचर होम और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के लिए जिला मुख्यालय सरवरी कुल्लू में बैठक करने के लिए एनजीओ भवन की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है, लेकिन जिले के सैकड़ों पेंशनर्स का अपना पेंशनर भवन न होने के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।