जोड़ मेले में बाबा हुसैनपुर वाला ने बांधा समा
नगर परिषद संतोषगढ़ स्थित ऐतिहासिक श्री गुरु रविदास मंदिर में दो दिवसीय सालाना 19वें घल्लू घारा जोड़ मेला का समापन बुधवार देर रात आरती और सरबत के भले की अरदास के साथ संपन्न हुआ। वर्ष 2005 के मंदिर प्रकरण में भूमिका निभाने वाले दिवंगत रामदास भाटिया को समर्पित आयोजन में उनके परिवार सदस्यों को सम्मानित किया गया। बाबा सतनाम सिंह हुसैनपुर वाल ने यहां नाम वाला अमृत पी जी संगत से समा बांधा। दूसरी और अंतिम प्रस्तुति में प्रसिद्ध गायक कांशीनाथ ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर हजारों की संख्या में मौजूद संगत को झूमने पर विवश कर दिया। जोड़ मेला कमेटी के चेयरमैन बलवंत सिंह, गुरु रविदास कमेटी संतोषगढ़ के प्रधान एडवोकेट कुलविंद्र सिंह ने मंदिर सहित यहां सुशोभित मूर्ति का स्मृति चिन्ह और सिरोपा देकर सम्मानित किया। स्थानीय किरण वाला को पीएचडी सहित दुबई में सम्मान पाने के लिए मंच पर सराहना की गई। रूप से मेला के संस्थापक क्रांतिकारी पूर्व विधायक शिंगारा राम सहूंगड़ा के बेटे कुंवर जगवीर सिंह सिद्धू व उनकी पत्नी सुमन कुमारी और बेटी परी को भी सम्मान दिया। कुंवर जगवीर सिंह ने पिता की स्मृतियों को याद करते हुए जोड़ मेले का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में हुए मंदिर प्रकरण के बाद यहां स्थापित मंदिर का महत्व है, अन्यथा गुरु महाराज के धार्मिक आयोजन पूरे विश्व में मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वार्षिक आयोजन की वृद्धि के लिए सभी संकल्प लेकर चलें। जोड़ मेले के चेयरमैन बलवंत सिंह ने कहा कि जोड़ मेला का इतिहास हमारी आन-बान-शान से जुड़ा है। इसके लिए समाज का खून भी बहा है। उसी जीत का नतीजा यह घल्लू घारा दिवस और जोड़ मेला है। इसका आयोजन सभी के सहयोग से युगों-युगों तक चलेगा। इस दौरान कांशीनाथ ने अपनी प्रस्तुतियां संग उपदेश से संगत को मंत्रमुग्ध किया। अंत में तवीन पहेश ने आरती की। मंदिर कमेटी के प्रधान कुलविंदर सिंह ने मेले में सहयोग के लिए सभी का आभार किया। इस अवसर पर गुरु रविदास धार्मिक सभा संतोषगढ़ के प्रधान कुलविंद्र बैंस, उपप्रधान बचन चंद पटेल, सचिव मनोहर लाल, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार बस्सन, सुरजीत सिंह, राजकुमार, कांग्रेस एससी सैल के पूर्व जिला अध्यक्ष रवि बस्सी, नप अध्यक्ष निर्मला देवी, पूर्व पार्षद प्रेम चंद, पूर्व प्रधान मदन लाल, बलवीर सिंह बबलू, तरसेम लाल बसन, सुलिंद्र चोपड़ा, सुरिंद्र बस्सी, कश्मीरी, लाल राममूर्ति, राजकुमार, महेश सहजल, नवीन महे, बलराम आदि संगत मौजूद रही।