आजादी के बाद सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई बड़ा भंगाल घाटी
अति दुर्गम बड़ा भंगाल घाटी आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है और न ही इस घाटी में अभी तक अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो पाई है। बड़ा भंगाल वासियों तथा पंचायत स्तर पर कई बार मांग करने के बावजूद भी आजतक सता में रहने वाली कोई भी सरकार इस घाटी के लोगों के लिए संपूर्ण प्रदान करने में नाकाम ही रही है। बड़ा भंगाल घाटी के प्रधान मनसा राम भंगालिया से रूबरू होकर पत्रकार को बताया कि बड़ा भंगाल घाटी में मात्र एक गांव है और एक ही बड़ा भंगाल पंचायत नामक पंचायत स्थापित की गई है। इस गांव में मौजूदा समय में 78 परिवार निवास करते हैं और इस गांव की लगभग 680 आबादी है। उन्होंने बताया कि यहां पर सुविधा के नाम पर वर्ष 2022 में हिम उर्जा कंपनी द्वारा बिजली आपूर्ति के नाम पर सोलर लाइट का प्रावधान ही हो पाया है और स्वास्थ्य सुविधा के लिए आयुर्वैदिक डिस्पेंसरी को सरकार ने लगभग 25 वर्ष पूर्व ही स्थापित कर रखा है मगर वे भी लगभग 12 वर्षों से फार्मासिस्ट के न होने से आजकल गत कई वर्षों से ताला ही लगा हुआ है। इसके साथ–साथ सरकार ने शिक्षा सुविधा के लिए पहले प्राथमिक, उसके बाद मिडल तथा वर्ष 2000 में इसका दर्जा बढ़ाकर हाई स्कूल तो कर दिया गया है मगर इस पाठशाला में भी गत लगभग पांच वर्षों से अध्यापकों के विभिन्न पद खाली पड़ गए हैं। वर्तमान समय में इस पाठशाला में शारीरिक, नॉन मेडिकल, कला अध्यापक और शास्त्री अध्यापक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं वहीं यहां पर अभी तक टेलीफोन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इस घाटी में असुविधाओं का अम्बार होने के बावजूद भी सरकार यहां पर संपूर्ण सुविधा प्रदान ही नहीं करवा रही है। ऐसी स्थिति में यहां के लोग अपना जीवन कैसे व्यतीत करते होंगे यह तो इस घाटी के लोगों के सिवाय और कोई नहीं जान सकता है। मनसा राम भंगालिया ने बताया कि इस घाटी तक कार्पोरेशन द्वारा यहां तक सड़क सुविधा न होने के चलते छोटा भंगाल घाटी के बड़ाग्रां से होते हुए जंगली, उबड खाबड़ व चढाईदार रास्ते से होते हुए लगभग अठारह हजार फुट की ऊंचाई वाले बर्फिले थमसर जोत को लांघकर घोड़ों के माध्यम से इस घाटी तक लगभग साठ किलोमीटर का सफर तय कर दो से तीन दिन में पहुंचाया जाता है, जिस कारण भी घोड़ चालकों को भी राशन पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस घाटी के लोग इतनी कठिनाई के स्थ जीवन यापन करने के बावजूद भी घाटी निवासियों की बार-बार मांग करने के बाद भी सरकार इस घाटी को जनजातीय क्षेत्र भी घोषित ही नहीं कर पा रही है। मनसा राम भंगालिया ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार से पुरजोर से मांग की है कि यहां पर सम्पूर्ण सुविधा प्रदान करने के साथ इस घाटी को जनजातीय क्षेत्र शीघ्र से शीघ्र घोषित किया जाए।