जल्द बने बागासराहन की बशलेउ टनल: प्रेम ठाकुर
कुल्लू जिले के आनी विधानसभा क्षेत्र के निरमंड उपमंडल की दुर्गम पंचायत बागासराहन से बशलेउ जोत के नीचे से बंजार के बठाहड़ तक सुरंग बनाने की मांग एक बार फिर उठी है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस टनल के बनने से न केवल अवेरी और किन्नौर से सेना की टुकडिय़ों को सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचना आसान होगा, बल्कि निरमंड क्षेत्र के पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
पर्यटन को भी लगेंगे पंख
बागासराहन एक विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां करीब 300 बीघा का एक पौराणिक मैदान नुमा भाग है, जिसकी सुंदरता को निहारने के लिए हर साल सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के समय मे बागासराहन में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई मंजिल-नई राहें योजना के तहत 29 करोड़ 40 लाख रुपए की एक डीपीआर भी विचाराधीन है। ऐसे में बशलेउ टनल के निर्माण से शिमला, कुफरी, नारकंडा से कुल्लू मनाली जाने वाला पर्यटक बागासराहन की सुंदरता को निहारकर आगे बढ़ सकेंगे।
निरमंड से कुल्लू 120 किलोमीटर तक घटेगी दूरी
इस सुरंग के निर्माण को लेकर प्रयास कर रहे निरमंड विकास खंड की बागासराहन पंचायत के प्रधान प्रेम ठाकुर ने इस बार एक बार फिर देश के रक्षामंत्री, भूतल एवं परिवहन मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री से एक बार फिर बशलेउ सुरंग के निर्माण को लेकर औपचारिकताएं शुरू करने की गुहार लगाई है। प्रधान प्रेम ठाकुर का कहना है कि निरमंड उपमंडल की 32 पंचायतों की हजारों आबादी को जिला मुख्यालय कुल्लू पहुंचने के लिए वाया जलोड़ी जोत होकर करीब 120 किलोमीटर अतिरिक्त सफर कर पहुंचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हालांकि बागासरहान से बशलेउ जोत होकर बठाहड़ तक सड़क भी प्रस्तावित है, लेकिन इस सड़क के निर्माण में बहुमूल्य पेड़ों का बेहद कटान होगा, जबकि बागासराहन से बठाहड़ टनल बन जाने से जिला मुख्यालय कुल्लू का सफर आसान होगा और वे अपने काम समय पर निपटा कर सुबह जाकर शाम को वापस घर आ सकते हैं।
2023 में बागासराहन पंचायत ने प्रधानमंत्री को भेजा था प्रस्ताव
प्रेम ठाकुर ने बताया कि बागासराहन पंचायत की ओर से जनवरी-2023 में देश के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को एक प्रस्ताव भेजा भी गया है, जिसमें बताया गया है कि निरमंड के आवेरी नामक स्थान पर (उत्तरी क्षेत्र) थल सेना का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित है। यहां से प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद फौज के जवानों को आर्मी की गाडिय़ों के द्वारा लेह-लद्दाख और अन्य सीमाओं पर तैनात किया जाता है, जबकि किन्नौर में भी सेना की बड़ी छावनी है, जिन्हें लेहलद्दाख की सीमा पर आवाजाही करनी होती है। सर्दियों में सैनिकों को वाया करसोग या वाया तत्तापानी, बिलासपुर होकर 300 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करना पडता है। ऐसे में प्रस्तावित टनल का निर्माण होता है, तो सेना के जवानों को लेह-लद्दख की सीमा तक पहुंचने के लिए साल के 12 महीने सड़क सुविधा मिलेगी और करीब 120 किलोमीटर दूरी कम तय करनी पड़ेगी।
'मैंने गत वर्ष विधायक प्राथमिकता की बैठक में बशलेउ टनल को लेकर कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह और पूर्व सीपीएस सुंदर ठाकुर के समक्ष बात रखी थी, जिस पर उन्होंने हामी जताई है। साथ जी केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री से मिलकर भी इस मांग को प्राथमिकता के साथ रखा जाएगा। लोकेंद्र कुमार, विधायक, आनी विधानसभा क्षेत्र।
'बागासराहन पंचायत प्रधान की मांग के बाद हमारे कार्यालय से मुख्य अभियंता ने टनल की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी, जिसकी एक रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई थी, लेकिन अभी तक मंत्रालय से इसकी डीपीआर बनाने को लेकर बजट का कोई प्रावधान नहीं हुआ है, जैसे ही बजट का प्रावधान होगा डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मनोज कुमार, अधिशाषी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, निरमंड।