लडोली पंचायत ने निजी भूमि पर ही बना दिया सार्वजनिक शौचालय
उपमंडल अंब के लडोली पंचायत में पंचायत ने संपूर्ण स्वच्छता अभियान ग्रामीण के तहत सामुदायिक शौचालय बनाने के लिए मिले 2 लाख 10 हजार रुपए को स्वाहा कर दिया। पंचायत मुखिया के सहमति से सामुदायिक तौर पर लोगों को लाभ देने की बजाए पंचायत में दरिया दिली दिखाते हुए अपने वार्ड पंच के घर में ही शौचालय बना दिए। इस कार्य में पंचायत के मुख्य लोग ही नहीं विकास खंड कार्यालय अंब की भी कलई खुलकर सामने आ गई। दरअसल फरवरी 2021 में लडोली पंचायत को संपूर्ण स्वच्छता अभियान ग्रामीण के तहत सामुदायिक शौचालय बनाने के लिए 2 लाख 10 हजार की राशि आवंटित हुई थी। पंचायत के प्रमुख पदाधिकारी अपने वार्ड पंच इस कदर मेहरबान हुए कि उसने इनका निर्माण उसके आंगन में ही कर डाला। अगस्त 2023 में इसी गांव के काबल सिंह ने इसकी शिकाया जिला पंचायत अधिकारी के पास की। सितंबर माह में उन्होंने इसकी जांच के निर्देश बीडीओ अंब को दे दिए। 6 महीने तक विकास खंड कार्यालय ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। विवाद बढऩे के बाद जनवरी 25 में विभाग ने इसकी जांच की। जांच में पाया गया कि जिस जगह यह शौचालय बनाए गए हैं, उसके आसपास के ज्यादातर घरों में शौचालय बने हुए हैं और जिस भूमि पर बनाए गए हैं, वह वार्ड पंच की अपनी निजी भूमि है। अगस्त 2023 में शिकायत होने के बाद वार्ड पंच ने बड़ी ही होशियारी से 31 जनवरी, 2024 को इस जमीन को पंचायत के नाम कर दिया। बड़ी बात है कि यह शौचालय न केवल वार्ड पंच के आंगन में बनाए गए हैं, बल्कि उनके दरवाजे भी उनके आंगन की तरफ ही लगाए गए हैं। नियमों अनुसार सामुदायिक शौचालय को न केवल आम जनमानस के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों की तरफ होने चाहिए, बल्कि इनका निर्माण भी पंचायती भूमि पर ही होना चाहिए। पंचायत के कर्ताधर्ता ने सभी नियमों को ताक पर रखकर अपने वार्ड पंच को लाभ देने के लिए सरकार की संपूर्ण स्वच्छता अभियान के 2 लाख 10 हजार की तिलांजलि दे दी। इस संदर्भ में विकास खंड अधिकारी ओमपाल डोगरा का कहना है कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान ग्रामीण के तहत बने इन शौचालयों के निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई है। जिस जगह पर इनका निर्माण किया गया है, उससे स्पष्ट होता है कि शौचालय व्यक्ति विशेष को लाभ देने के नजरिए से बनाए गए हैं । मामले की जांच रिपोर्ट को आगामी कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है। वहीं, पंचायत प्रधान ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि पहले भूमि पंचायत के नाम की गई थी, फिर ही निर्माण किया गया था।