प्रदेश में पेड़ कटान पर प्रतिबंध का असर दोगुने हुए श्मशान की लकड़ी के दाम
प्रदेश में पेड़ कटान पर लगे प्रतिबंध का असर अब मोक्षधाम में भी दिखने लगा है। दरअसल पेड़ कटान पर प्रतिबंध लगने से वन निगम की लकड़ी भी महंगी हो गई है। इसका असर शहरी क्षेत्रों के मोक्षधाम यानी श्मशानघाट में भी देखने को मिला है। नगर निगम सोलन टेंडर कर ठेकेदार से शमशान की लकड़ी खरीदता है, लेकिन पेड़ कटान में लगे प्रतिबंध के बाद ठेकदार ने सप्लाई बंद कर दी है। ऐसे में अब श्मशानघाट में शवदहन करना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर जनमानस पर पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक सोलन के चंबाघाट स्थित श्मशानघाट में पहले एक ठेकेदार करीब 540 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से लकडिय़ों उपलब्ध करवाता था, पर कटान पर प्रतिबंध लगाने के बाद ठेकेदार ने सप्लाई बंद कर दी है। अब नगर निगम वन विभाग से लकडिय़ां खरीद रहा है, लेकिन लकड़ी के दाम में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी की है। लिहाजा अब सोलन नगर निगम शहर के चंबाघाट स्थित श्मशानघाट में डिपो की लकड़ी महंगी कर सकता है। फिलहाल वन विभाग लगभग 1140 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से नगर निगम को लकडिय़ां दे रहा है। जो कि ठेकेदार के मुकाबले बहुत ज्यादा है। ऐसे में चंबाघाट में शमशानघाट में शव दहन करने में पहले से दोगुने दाम चुकाने पड़ेंगे। हालांकि, कई लोगों का यह भी मानना है कि सरकार यदि कई प्रकार की लकडिय़ों से बैन हटा दे तो फिर एक बार ठेकेदार लकडिय़ों सप्लाई करना शुरू कर देगा। इस बीच लकडिय़ों के रेट में हुए डबल इजाफे से नगर निगम भी परेशान है। चंबाघाट स्थित श्मशानघाट में अब भी शव दहन महंगा है। यहां करीब एक शव जलाने के लिए लगभग 6 से 7 क्विंटल लकड़ी लगती है। जिसकी कीमत 650 रुपए क्विंटल के हिसाब से लगभग 5200 रुपए आती है। चंबाघाट में लगभग रोजाना तीन से चार शव जलाने के लिए लाए जाते है। प्रदेश सरकार द्वारा सफेदा, खैर, पपलर और बांस के अलावा सभी प्रकार की लकडिय़ों पर बैन लगा दिया गया है। मुसीबत यह है कि यह सभी लकडिय़ां महंगे दामों पर मिलती है। लिहाजा ठेकेदार इसे प्रोवाइड करवाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है, इसलिए ठेकेदार ने अपनी सप्लाई बंद कर दी है।