तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाश रहे धवाला
हिमाचल प्रदेश भाजपा में आने वाले दिनों में बवाल मच सकता है। इसकी वजह कांग्रेस के 6 बागी और 3 पूर्व निर्दलीय विधायकों की भाजपा में एंट्री बन सकती है। पूर्व मंत्री रमेश चंद धवाला ने सियासी उथल-पुथल के संकेत दे दिए हैं। धवाला कह चुके हैं कि जितने भी भाजपा के नाराज नेता हैं, उनके साथ बैठेंगे और जल्द धमाका करेंगे। यही नहीं धवाला ने शुक्रवार को देहरा में एक मीटिंग भी बुलाई है। इसमें वह पार्टी वर्कर के साथ चर्चा करके प्रदेश भ्रमण पर जाने का फैसला लेंगे, ताकि इस दौरान भाजपा के नाराज व हाशिये पर चल रहे नेताओं से चर्चा की जा सके। इसके आधार पर तीसरे मोर्चे के गठन पर निर्णय लिया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि रमेश धवाला की नजरें पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा, पूर्व सांसद कृपाल परमार, बड़सर से पूर्व विधायक बलदेव शर्मा, किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत नेगी, प्रवीण शर्मा इत्यादि पर है। धवाला इन नेताओं से तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर चर्चा करेंगे। रमेश धवाला चार बार के विधायक, दो बार के कैबिनेट मंत्री और एक बार चेयरमैन (कैबिनेट) रैंक है।
क्यों नाराज हैं रमेश चंद धवाला
बता दें कि भाजपा ने बीते साल उपचुनाव में देहरा सीट से रमेश चंद धवाला की टिकट काट दी थी और टिकट पूर्व निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को दिया गया। इससे धवाला भड़क गए हैं। इसी तरह सुजानपुर, कुटलैहड, गगरेट, हमीरपुर, बड़सर, नालागढ़, धर्मशाला और लाहौल-स्पीति में भी भाजपा नेताओं की टिकट काट दी गई। इनमें पूर्व मंत्री एवं कुटलैहड़ के विधायक वीरेंद्र कंवर, पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा जैसे दिग्गज भी शामिल रहे हैं। हालांकि उपचुनाव में रामलाल मारकंडा ने तो बागी होकर उपचुनाव भी लड़ा। धर्मशाला में भी राकेश चौधरी ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। मगर दूसरी जगह उपचुनाव में भाजपा बागियों को मनाने में कामयाब हो गई थी।
2022 के बागियों से चर्चा करने की योजना
प्रदेश भ्रमण के दौरान 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से बगावत करने वाले बागियों से भी धवाला चर्चा की योजना बना रहे हैं। साल 2022 के चुनाव में भाजपा से 21 बागियों ने बगावत की थी और बीजेपी की चुनाव में हार की बड़ी वजह यह बगावत बनी थी।
धूमल गुट के नेताओं से भी करेंगे संपर्क
रमेश धवाला की नजरें पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल गुट के नेताओं पर टिकी हुई है, क्योंकि धूमल गुट के नेता सात-आठ सालों से हाशिये पर महसूस कर रहे हैं। धवाला ऐसे सभी नेताओं को एकजुट करने के दावे कर रहे हैं। उन्हें कितनी कामयाबी मिलती है, तो यह तो भविष्य के गर्भ में है।