जंगलबैरी के दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट पर लटका ताला
करोड़ों के इंफ्रास्ट्रक्चर से सुसज्जित जंगलबैरी स्थित 'दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट' धूल फांक रहा है। प्रोसेसिंग से जुड़ी कोई भी गतिविधि इस बिल्डिंग में नहीं हो रही है। धीरे-धीरे यहां से मशीनरी भी प्रदेश के अन्य प्लांट्स में शिफ्ट होनी शुरू हो चुकी है। दुग्ध प्रोसेसिंग से जुड़ी हुई कोई भी गतिविधि करीब 5 साल से नहीं हुई है और भवन पर ताले लटके हुए हैं। तत्कालीन भाजपा सरकार के समय इस दुग्ध प्रोसेसिंग केंद्र का निर्माण हुआ था। कुछ साल तक यहां मशीनरी नहीं आई। बाद में जब आना शुरू हुई तो वर्ष 2018 के आसपास करीब दो-तीन साल तक गतिविधियां शुरू भी हुईं, लेकिन उसके बाद अब फिर यह केंद्र बंद हो चुका है।
बल्डिंग में तमाम सुविधाए
बल्डिंग में तमाम तरह की सुविधाएं हैं, जो मिल्क प्लांट के लिए होनी चाहिएं। दूध, पनीर, दही की पैकिंग यहां होती है। मशीनरी है, चिलिंग प्लांट है। हिमाचल में ऐसे 11 प्लांट हैं, हर एक जिले में एक-एक हैं। हमीरपुर में भी यही था, लेकिन केवल इसी जिले का यह प्लांट बंद है। मिल्क फेडरेशन के हवाले गतिविधियों का लेखा-जोखा है। वह इसे कमाऊ पूत नहीं मान रहा। सवाल है कि यदि इस जगह पर यह प्लांट फिजिबल ही नहीं था, तो फिर इसका निर्माण क्यों हुआ?
लोगों से बैठक कर प्रोडक्शन पर की चर्चा, नहीं बनी सहमति: राधे कृष्ण
मंडी जिले में स्थित मिल्कफेड के टेक्निकल सुपरिंटेंडेंट राधे कृष्ण का कहना है कि इलाके में दो-तीन बार लोगों से मिलकर बैठक की गई, उनसे यहां दूध की प्रोडक्शन को लेकर चर्चा भी हुई, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। फिलहाल यहां गतिविधियां बंद हैं। वहीं, हमीरपुर स्थित वेटरनरी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर स्टार के नोडल अधिकारी सतीश वर्मा का कहना है कि यह प्लांट उनके अंडर नहीं आता है। यह हिमाचल मिल्क फेडरेशन के तहत ही पड़ता है और वही इसकी देखरेख करते हैं। जंगलबैरी पंचायत के प्रधान प्रीतम चंद का कहना है कि यदि यह इमारत प्रोसेसिंग यूनिट के रूप में इस्तेमाल नहीं होनी हो, तो इसे किसी और पर्पज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ साल पहले पंचायत में प्रस्ताव भी भेजा था, पर गौर नहीं हुई। उपप्रधान अरुण ठाकुर का कहना है कि इसे री-स्टार्ट करना चाहिए, अगर नहीं होता है तो लीज पर दे देना चाहिए।