मरम्मत कार्य की बाट जोह रही कुर्पन खड्ड सिंचाई नहर
एक तरफ सरकार और जलशक्ति विभाग टैंकरों, स्कूटी या सरकारी जीपों में पेयजल सप्लाई के नाम पर करोड़ों रुपए बहा रही है। वहीं, दूसरी ओर बादल फटने के बाद ध्वस्त हुई निरमंड की सिंचाई योजना कुर्पन नहर पिछले 6 माह से मरम्मत की बाट जोह रही है। फलस्वरूप इस सिंचाई नहर से लाभान्वित होने वाले निरमंड खंड की 8 पंचायतों के 7000 से ज्यादा किसानों, बागवानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं और उनकी खेतीबाड़ी पर संकट गहरा गया है। उन्हें अपने जीवन यापन के साथ-साथ, बैंक के ऋण चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। जलशक्ति विभाग के पास बजट का प्रावधान न होने के कारण अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। फलस्वरूप इस सिंचाई नहर से लाभान्वित होने वाले और नहर की देखभाल करने वाले कुर्पन कूहल कृषक विकास संघ निरमंड ने भी चिंता जताई है और सरकार से पूछा है कि आखिर यह कार्य पूरा कब होना है? उन्होंने सरकार से बजट का प्रावधान जल्द करने और नहर को सुचारू करने की गुहार लगाई है।
31 जुलाई 2024 को बादल फटने से हुई तबाही में ध्वस्त हुई नहर
कुर्पन कूहल कृषक विकास संघ, निरमंड के प्रधान प्रदीप स्नेही, उपप्रधान प्रेम सिंह राठौर, तकनीकी सलाहकार अशोक शर्मा, सचिव दीपेक्ष शर्मा, सलाहकार भलकू राम, कोषाध्यक्ष दीपक शर्मा, ताबे राम, संजीव कुमार, अमर सिंह, राकेश कुमार आदि किसानों का कहना है कि गत वर्ष 31 जुलाई को श्रीखंड की चोटियों में बादल फटने के कारण आई बाढ़ से कुर्पन नहर का 300 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया कई जगह से सिंचाई कूहल टूट गई है, जिसके कारण इस सिंचाई कूहल में पानी की सप्लाई ठप पड़ी है।
जल्द संघ मांगों को लेकर जाएगा शिमला
संघ के प्रधान प्रदीप स्नेही, उपप्रधान प्रेम सिंह राठौर ने बताया कि 17 किलोमीटर लंबी इस सिंचाई नहर से निरमंड खंड की कोट, बड़ीधार, तवार, भालसी, शिशवी, डीम और बाहवा आदि पंचायतों के अलावा नगर पंचायत निरमंड की करीब 7 हजार किसान आबादी प्रभावित हो चुकी है। इस सिंचाई नहर और वर्षा पर आधारित खेती के कारण फसलें नहीं उगाई जा रही है। सेब की नर्सरी लगाई है, वो खत्म होने की कगार पर है। वहीं, कुर्पन कूहल कृषक विकास संघ निरमंड किसानों का कहना है प्रदेश सरकार ने क्षतिग्रस्त सड़कों की तुरंत मर्मत करवाई, वैली ब्रिज रिकॉर्ड समय में बनाए, लेकिन किसी ने भी किसानों के जीवन यापन को लेकर कुर्पन नहर की मर्मत की नहीं सोची। संघ का कहना है कि वे जल्द अपनी मांगों को लेकर शिमला जाएंगे और जलशक्ति मंत्री से गुहार लगाएंगे और अगर जरूरत पड़ी, तो धरना-प्रदर्शन भी करेंगे।