बिलासपुर में नशा मुक्ति दवाओं का दुरुपयोग कर रहे युवा मरीज
प्रदेश में इन दिनों चिट्टे ने अपने पांव पूरी तरह से पसार लिए है। इस नशे में युवा पीढ़ी दिन-प्रतिदिन डूबती जा रही है। वहीं, इस नशे में चूर कुछ युवा इससे पीछा भी छुड़वाना चाहते है, तो कुछ युवा ऐसे भी है जिन्हें चिट्टा न मिलता है तो सरकारी अस्पतालों में जाकर चिट्टे का वैकल्पिक मार्ग अपनाकर दवाइयों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा ही इन दिनों जिला अस्पताल बिलासपुर में देखा जा रहा है, जहां प्रतिदिन चिट्टे का सेवन कर रहे युवा यहां पर तैनात मनोचिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन वह इन दवाइयों का सही प्रयोग न करते हुए चिट्टा न मिलने की एवज में इन दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। ऐसे में यह सारा आकलन बिलासपुर अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे मनोचिकित्सक डॉ. आयुष शर्मा ने किया है, जिसके बाद उन्होंने अब आदेश जारी किए हैं कि अगर कोई भी युवा नशा छुड़वाने के लिए पहुंच रहा है तो उसके अपने साथ परिजन लाना अनिवार्य है। अगर कोई भी युवा बिना परिजन से उनके पास आता है तो वह उसकों दवाइयां नहीं लिखेंगे। क्योंकि देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी इन दवाइयों का गलत इस्तेमाल करके नशे को नहीं छोड़ रहे है। बिलासपुर जिला की बात करें तो जिला में ओवरडोज व नशे से पीडि़त काफी युवाओं की मौत हो चुकी है। क्योंकि यह युवा चिट्टे के सेवन के लिए नशे को छोडऩे की दवाइयों का भी सेवन करते रहे, जिससे उल्टा असर हो रहा और उनकी मौत भी हुई है। वहीं, आए दिन पुलिस प्रशासन द्वारा भी नशा माफियों को पकड़ा जा रहा है, लेकिन फिर भी यह नशा कम नहीं बल्कि आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान में बिलासपुर जिला की बात करें तो स्थिति बहुत ही गंभीर बनी हुई है। मनोचिकित्सक डॉ. आयुष शर्मा ने बिलासपुर जिले के लोगों से आग्रह किया है कि अपने बच्चों पर विशेष नजर रखें। साथ ही यह ध्यान रखें कि आपका बच्चा कहीं पैंटाडॉल और टामाडॉल दवाइयों का सेवन तो नहीं कर रहा है। क्योंकि यह दवाइयां अधिकतर युवा नशे के तौर पर यूज कर रहे हैं, जिससे उनकी मौत हो रही है। नशा माफिया नए युवाओं को शुरुआत में फ्री में नशे की लत लगाते हैं और फिर उनके जरिये ही पंजाब और अन्य जगहों से नशे की खेप मंगवाते हैं। इस तरह खुद किंगपिन पुलिस की नजर से दूर रहते हैं। युवतियां भी इस तरह की तस्करी में शामिल हैं। चिट्टा के पांव पसारने पर अब जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर ही चिट्टा तस्करों को पकड़ रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो चिट्टा या अन्य नशे में डूबा व्यक्ति जब नशे की ज्यादा लत में पड़ जाता है तो वह आम व्यक्ति की तरह साधारण बात नहीं करता है।