विद्या और बुद्धि की देवी हणोगी माता: नदी के पार स्थित प्राचीन मंदिर, फोरलेन निर्माण से श्रद्धालुओं को पहुंचने में आ रही दिक्कत
हणोगी माता मंदिर में चैत्र नवरात्र में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर हाजरी लगा रहे हैं, लेकिन इस बार यह भीड़ कम ही नजर आ रही है। क्योंकि फोरलेन बनने से अधिकतर लोग यहां से नहीं गुजर रहे हैं। हणोगी माता को विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है। एक किंवदंती के अनुसार हणोगी माता का जन्म एक कोयले के टुकड़े से हुआ था जो आंधी के दौरान आसमान से गिरा था। उसे एक चरवाहा अपने घर ले गया और उसे अपनी बेटी की तरह पाला, वह बड़ी होकर एक सुंदर और बुद्धिमान देवी बनी, जिसके पास चमत्कारी शक्तियां भी थी। देवी लोगों के रोग स्पर्श कर ठीक कर देती थी। आगे चल कर वह हणोगी माता के रूप में विख्यात हुई। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में माता हणोगी न्यास का विशेष स्थान है। यह मंडी जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर कुल्लू -मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग के हणोगी नामक स्थान पर स्थित एक बहुत बड़ा संस्थान है, जिसका मंदिर पंडोह डैम की झील के किनारे पहाड़ी काट कर बनाया गया है। एक तरफ रमणीय झील का सुंदर नजारा और दूसरी ओर ऊंची पहाड़ियां माता रानी की महिमा का गुणगान करती है। मंदिर की छत पर ऊंची पताका तेज हवाओं से माता की अपार शक्ति को हवाओं के माध्यम से समूचे देश में फैलाती है। इस मंदिर में माता काली, माता सरस्वती और माता लक्ष्मी साक्षात विराजमान रहती है। जो अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है। मंदिर के प्रवेशद्वार पर माता दुर्गा विराजती हैं। पुष्प रूपी गुंबद माता के सुंदर स्वरूप का प्रतीक है।
गुफाओं में माता हणोगी का प्राचीन मंदिर
मंदिर के पीछे कल कल बहती व्यास नदी माता रानी की पवित्रता की परिचायक है। ब्यास नदी के उस पार ऊंची पहाड़ियों की गुफाओं में माता हणोगी का प्राचीन मंदिर आज भी भक्तों को बरबस ही अपनी और आकर्षित करता है। यहां तक पहुंचाने के लिए रोपवे की शानदार व्यवस्था आधुनिकता का परिचारक है। मगर हैरत की बात है कि चैत्र नवरात्र में भी माता के मंदिर में वर्ष 1999 जैसे भीड़ नदारद है। फोरलेन ने मंदिर को विरान कर दिया है। आज भी पुराना सड़क मार्ग पूरी तरह से बाधित है, जिस कारण माता का यह मंदिर भक्तों की पहुंच से दूर हो रहा है।
सड़क मार्ग को सुचारू करने की जरूरत
मंदिर के आचार्य विवेक शर्मा ने बताया कि संस्थान की जनकल्याणकारी योजनाएं जैसे गौ सदन, लंगर, सराए और पूजन आदि सभी कार्य निरंतर जारी है। दूर दूर से श्रद्धालु आते भी हैं, मगर पहले के मुकाबले अब बहुत ही कम भीड़ है। इसका मुख्य कारण सड़क का अवरुद्ध होना है। सरकार इस सड़क मार्ग को जल्द सुचारू करें तो माता के भक्तों को सुविधा मिलेगी। संस्थान की आय भी बढ़ेगी। पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि माता की कृपा हमेशा भक्तों पर बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही माता के प्रभाव से इस संस्थान में फिर से रौनक लौट आएगी। इसके लिए भक्तों की निरंतर माता के दरबार में हाजरी की जरूरत है।