किसानों के आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ते कदम
परियोजना निदेशक आतमा कृषि विभाग ऊना वीरेंद्र कुमार बग्गा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर किसानों के हित में विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि किसानों की आर्थिकी में सुधार आ सके। इन योजनाओं के द्वारा किसानों को विभिन्न प्रकार के आदानों पर अनुदान दिया जाता है। जिला ऊना के दो विकास खंड ऊना एवं हरोली में किसान वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं जिनका संचालन संतोष शर्मा, उपपरियोजना निदेशक ऊना कर रही हैं। वर्ष 2018 में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 'सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती' को शुरू किया गया। इस योजना का उद्देश्य किसानों द्वारा शून्य लागत पर जहर मुक्त खेती करना है तथा रसायनों पर आधारित खादों, खरपतवार नाशकों, फफूंद नाशकों तथा कीटनाशकों के उपयोग पर खेती में प्रतिबंध लगाना है ताकि मृदा, पानी, पेड़-पौधे, जल एवं वायु आदि रसायन मुक्त हों तथा मनुष्य को खाने-पीने के लिए रसायन रहित पोष्टिक खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके। हम जानते हैं कि आज इन रसायनों के खेती में बढ़ते उपयोग ने मनुष्य के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाला है तथा जीवन के लिए घातक कैंसर जैसी भयानक / लाइलाज बीमारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इन्हीं दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा 'प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना' हिमाचल प्रदेश राज्य में शुरू की गई। वर्ष 2018 में चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में ऊना एवं हरोली के किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा दिया गया। इस प्रशिक्षण में किसानों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न स्तंभों के बारे में जानकारी प्राप्त की है तथा इस खेती में देसी गउओं की विभिन्न नस्लों की भूमिका से संबधित प्रशिक्षण दिया गया। इस खेती में किसान अत्याधिक रुचि ले रहे हैं और प्रतिवर्ष प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रंबधन अभिकरण (आतमा), कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना
इस योजना के माध्यम से किसानों को देसी गाय की विभिन्न नस्लों जैसे साहिवाल,
राठी, रेड सिंधी, थारपारकर, गिर, कांक्रेज, ओंगोले, देसी पहाड़ी तथा देसी हरियानवी इत्यादि खरीदने पर 25000 तथा यातायात के लिए 5000 की सहायता दी जाती है, ड्रम खरीदने पर 75 फीसदी अनुदान जैसे 50- 200 लीटर क्षमता वाले तीन ड्रमों की खरीद पर 2250 रुपए का अनुदान मिलता है व गोमूत्र इकट्ठा करने के लिए फर्श बनाने पर 8000 रुपए की सहायता, संसाधन भंडार चलाने हेतु 10000 रुपए की सहायता का प्रावधान है।
डप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फार इनपुट डीलस
इस कार्यक्रम के अंतर्गत ऊना जिले के इनपुट डीलर्स को एक साल का डिप्लोमा करवाया जाता है, जिसमें 40 प्रतिभागी होते हैं ताकि वे कृषि के विभिन्न पहलुओं से परिचित हो सकें और किसानों को और अच्छी सेवाएं प्रदान कर सकें। यह डिप्लोमा 48 सप्ताह का है, जिसमें 40 कक्षाएं तथा 8 विभिन्न संस्थानों और किसानों के खेतों के भ्रमण दौरे हैं। यह कार्यक्रम अवकाश वाले दिन रविवार को ही रखा जाता है ताकि इनपुट डीलर्स के व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और अब तक देसी डिप्लोमा के 6 बैच पूरे हो चुके हैं तथा 7 बैच का डिप्लोमा कोर्स शुरू हो गया है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण आतमा केंद्र प्रायोजित योजना में किसानों के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शनी प्लाट इत्यादि का प्रावधान है। ऊना जिले में प्राकृतिक खेती की इस पद्धति को सुचारु तरीके से करने के लिए वर्ष 2018 से 2024 तक हरोली एवं ऊना विकास खंडों के किसानों को 2739 प्लास्टिक ड्रम, 88 देसी गाय, 31 नंबर संसाधन भंडार तथा 119 किसानों को फर्श बनाने पर (गोमूत्र इकट्ठा करने के लिए) सहायता दी जा चुकी है। इन दोनों विकास खंडों में 6131 किसानों को प्राकृतिक खेती करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा 5090 किसान 804.6 हेक्टेयर (20115.00 कनाल) क्षेत्रफल पर सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वर्ष 2024 में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत दोनों विकास खंडों में कुल 200 साइकिल हल वितरित किए गए हैं। हमें आशा है कि (आतमा) आने वाले समय में नए आयाम स्थापित करेगा। भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित यह योजना हरोली तथा ऊना ब्लॉक में चलाई जा रही है, जिसमें 1973 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है तथा किसानों की क्षमता बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण शिविर तथा भ्रमण दौरों का आयोजन किया जा रहा है। इस योजना के द्वारा ऊना तथा हरोली विकास खंड के कलस्ट्रोन में 635 हेक्टेयर क्षेत्रफल को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही इस स्कीम के अंतर्गत किसानों को अनुदान पर प्लास्टिक ड्रम भी दिए जाते हैं। इन दोनों विकास खंडों का अवलोकन संतोष शर्मा (उपपरियोजना निदेशक, आतमा - (98050 - 88750) कर रही हैं। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि प्राकृतिक खेती से जुड़ी सभी बातों की जानकारी के लिए विकास खंडों में नियुक्त एटीएम एवं बीटीएम से संपर्क करें।