चीड़ के पेड़ों के न काटने से लटका सलौणी दियोटसिद्ध सड़क को चौड़ा करने का कार्य
प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर जा रही सड़क को चौड़ा करने का कार्य लगभग दो माह पहले शुरू किया था, लेकिन सड़क की कटिंग करने के बाद चीड़ के पेड़ खतरा बने हुए हैं। चीड़ के पेड़ों को काटने के लिए लोक निर्माण विभाग ने एक माह पहले फोरेस्ट राइट एक्ट की अपू्रवल के लिए लेटर भेजा था, लेकिन अभी तक यह अपू्रवल लोक निर्माण विभाग को नहीं मिली है। राज्य सभा सांसद ने भी सलौणी से दियोटसिद्ध सड़क को चौड़ा करने के लिए लोक निर्माण विभाग से डीपीआर देने के लिए लेटर लिखा था। राज्य सभा सांसद ने श्रद्धालुओं को आ रही परेशानियों को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा करने के लिए सरकार को लिखा था। हालांकि लोक निर्माण विभाग से सलौणी लोक निर्माण विभाग ने जलाड़ी से दियोटसिद्ध मंदिर तक सड़क को चौड़ा करना शुरू कर दिया है, लेकिन सलौणी से दियोटसिद्ध सड़क पर चीड़ के पेड़ सड़क को चौड़ा करने में बाधा बन रहे हैं। वहीं, युवा मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी इंजी. आशीष ठाकुर ने बड़सर से कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष ढटवालिया पर आरोप लगाया है कि बड़सर की जनता ने उन्हें 31 हजार वोट दिए थे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होते भी सुभाष ढटवालिया फोरेस्ट राइट एक्ट की मंजूरी नहीं दिला पा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष ढटवालिया से सवाल किया है कि बड़सर विधानसभा क्षेत्र में कोई एक काम बता दें जो उन्होंने करवाया हो। हालांकि इस सड़क के लिए मुख्यमंत्री ने इस सड़क को चौड़ा करने के लिए 26 करोड़ रुपए दिए थे। उन्होंने कहा कि बाबा बालक मंदिर को जाने वाली सड़क को चौड़ा करने से श्रद्धालुओं को सुविधा होनी है, इसलिए सड़क को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में वन विभाग के अधिकारी एक छोटी सी परमीशन नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि सलौणी से दियोटसिद्ध तक चीड़ के पेड़ अब खतरा बनते जा रहे हैं। यहां तक कि ठेकेदार भी इन पेड़ों को नहीं काट रहा है। गौर रहे कि जलाड़ी से दियोटसिद्ध मंदिर तक सड़क को 5 से 7 मीटर तक चौड़ा किया जाना है। इसके लिए सड़क की कटिंग की जा रही है, लेकिन बीच में चीड़ के पेड़ आ गए हैं। इससे सड़क को चौड़ा करने का कार्य रुक गया है। सलौणी से दियोटसिद्ध तक लगभग 70 से 80 चीड़ के पेड़ हैं, जिन्हें काटना पड़ेगा। इसके लिए वन विभाग से एफआरए फोरेस्ट राइट एक्ट के तहत परमीशन मिलने से इन पेड़ों को काटा जा सकता है। इस बारे में डीएफओ अंकित कुमार ने बताया कि सलौणी से दियोटसिद्ध तक चीड़ के पेड़ों के कितने पेड़ कटने हैं, उसके बारे में आरओ से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही इन्हें काटने की परमीशन दी जाएगी।