निर्माण पर विवाद: रिटायरिंग और ओपन स्पेस क्यों रखा जा रहा खाली
बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध परिसर में लंगर भवन के पास निर्माणाधीन वीबीआईपी सराए में एक मंजिल पर ओपन स्पेस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सराए भवन में अब केवल चार मंजिलों में ही 20 कमरे तैयार किए जा रहे हैं। एक मंजिल के स्पेस को रिटायरिंग और ओपन स्पेस के हिसाब से खाली रखने की योजना को विस्तार दिया जा चुका है, जहां पर पांच कमरे और बनाए जा सकते थे। इसका कारण यह है कि निर्माण की ड्राइंग में इनका शुरू में प्रोविजन था, लेकिन बाद में अमेंडमेंट करवाए जाने की वजह से व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर निश्चित रूप में सवाल खड़े हो रहे हैं। तकरीबन 11 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस सुविधाओं से लैस छह मंजिला इमारत में श्रद्धालुओं के लिए फिलहाल 20 कमरों की अच्छी व्यवस्था होने जा रही है। इन कमरों का आकार भी काफी बड़ा है और इनके अंदर अब फर्नीचर किस आधार पर लगाया जाएगा, इसकस इंतजार हो रही है। क्या केवल एक ही डबल बेड होगा या फिर एक एक्स्ट्रा बेड की भी यहां व्यवस्था तैयार होगी, इस पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
कोई फैसला लेने को नहीं आ रहा आगे
दरअसल लंगर भवन के पास काफी स्पेस खाली है, वहीं साथ में बाबा बालक नाथ के महंत का भी रिहायशी बंगला है। यह इमारत नई सराए के बिलकुल उसके साथ तैयार हुई है। जहां पर पहले से एक और 9 नंबर सराए मौजूद है। नई सराय के जिस मंजिल के स्पेस को खाली रखा जा रहा है, उस पर सवाल उठ रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि यहां पर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन उसकी कितनी जरूरत है, सवाल इस पर हैं। जब इतनी बढिय़ा इमारत का निर्माण किया जा रहा है। यहां 20 की बजाए 25 कमरे तैयार हो जाएं, तो उसका फायदा भी तो श्रद्धालुओं को ही मिलना है। इस एक मंजिल के स्पेस को खाली रखने से न्यास प्रशासन को या फिर श्रद्धालुओं को कोई खास फायदा होने वाला नहीं है, यही तर्क दिया जा रहा है। विडंबना यह है कि कोई फैसला लेने की स्थिति में आगे नहीं आ रहा, जिस कारण पांच कमरों का निर्माण अब लटक कर ओपन स्पेस में चला गया है। चाहिए यह है कि मौजूदा ट्रस्ट को इस पर नए सिरे से फैसला लेना चाहिए और ओपन स्पेस की जगह कमरों का निर्माण होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त व्यवस्था हो सके। इसके लिए यह इतनी बड़ी इमारत खड़ी की गई है।
व्यवस्था के अनुसार ही हो रहा निर्माण
उधर, मंदिर अधिकारी और बिझड़ी के तहसीलदार संदीप ठाकुर का कहना है कि 6 मंजिलें बनाई गई हैं और इस पर तकरीबन 11 करोड़ खर्च हो रहे हैं। ड्राइंग की व्यवस्था के अनुसार ही इसका निर्माण हो रहा है।