हिमाचल में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था बीमार!
हिमाचल प्रदेश में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार है। स्वास्थ्य विभाग खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहा है। यह आरोप संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फे्रंस में लगाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ब्लड बैंकिंग व्यवस्था चलाने के लिए स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में बनी राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल का वर्षों से पुनर्गठन नहीं हुआ है और आठ वर्ष से अधिक समय से कोई मीटिंग नहीं हुई। अव्यवस्था के कारण कई बड़े ब्लड बैंकों से आम रोगियों को समय पर आवश्यकता के अनुसार रक्त नहीं मिल पाता है। अजय ने बताया कि कॉमन कॉज बनाम भारत सरकार (सीडब्ल्यूपी 91/1992) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी 1996 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। संपूर्ण ब्लड बैंकिंग व्यवस्था के संचालन एवं देखरेख के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र में नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल और हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल गठित की थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन और राज्यों की एड्स कंट्रोल सोसायटी को रक्त सुरक्षा और एड्स के कामकाज तक ही सीमित कर दिया था।
कागजों में चलती रही राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल
अजय ने कहा कि हिमाचल में राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल शुरू से ही सिर्फ कागजों पर चलती रही। सरकार का स्वास्थ्य सचिव इसका अध्यक्ष होता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों में स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ब्लड बैंकों से संबंधित समस्त योजनाओं, उनके संचालन और आवश्यकताओं की पूर्ति का कार्य करेगी। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं और रक्तदाताओं को मीडिया और कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक करने का कार्य भी शामिल है। यह वैधानिक व्यवस्था ठप हो जाने से ब्लड बैंकों में डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर, अन्य संसाधनों की कमी की ओर कोई ध्यान नहीं देता। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की गैर मौजूदगी में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज समेत सभी प्रमुख ब्लड बैंकों में स्टाफ और उपकरणों की काफी कमी है।
सीएम सुक्खू को लिखा पत्र
अजय श्रीवास्तव बताया कि मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है, क्योंकि यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानून के खुलेआम उल्लंघन का मामला है। मुख्यमंत्री इस पूरे मामले पर तुरंत ध्यान दें और सुप्रीम कोर्ट व अन्य संबंधित कानूनो का पालन सुनिश्चित करें। ब्लड बैंकों में रक्त की कमी से तड़पने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को न्याय देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के ज्मिेदार अफसर के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए।