People of Dalhousie and surrounding areas are troubled by the terror of monkeys
उपमंडल डलहौजी और इसके तहत आने वाले कई गांव बंदरों के आतंक से अच्छे खासे परेशान हैं। ये बंदर अक्सर उन राहगीरों को अपना निशाना बनाता हैं, जो लोग अपने हाथों में सामान से भरे लिफाफे अथवा बैग इत्यादि लिए रहते हैं। बंदर लोगों से बैग या लिफाफे छीनकर भाग जाते हैं। कई बार बंदरों के ऐसा करने से लोग घायल भी हुए हैं। इन आक्रामक बंदरों का कई बार तो बुजुर्ग एवं बच्चे निशाना बन चुके हैं। बात अगर प्रसिद्ध पर्यटक नगरी डलहौजी की की जाए तो गत वर्ष तीन से चार ऐसे मामले प्रकाश में आए थे कि बंदरों के झुंडों के हमले से लोगों को टांडा मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ा था। इस बारे में वन विभाग को लिखित एवं मौखिक रूप से शिकायत भी की गई, किंतु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उधर, इस बारे में वन अधिकारी डलहौजी रजनीश महाजन ने जानकारी देते हुए बताया कि वन विभाग द्वारा कई बार मंकी कैचर टीम को भी तैनात किया गया तथा कई बंदरों को पकड़कर दूर जंगलों में भी छोड़ा गया, किंतु ये दोबारा से आबादी वाले क्षेत्र का रुख कर लेते हैं। अभी मौजूदा समय में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड अधिक होने के कारण ये निचले क्षेत्र का रुख कर लेते हैं। प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है कि इस समस्या का कोई ठोस हल निकाला जाए। काबिले गौर है कि तमाम डलहौजी क्षेत्र में बंदरों की तादाद में काफी इजाफा हो गया है। इनके झुंड खेतों में लगी फसलों, फलों, फूलों एवं हर उस चीज का नुकसान करते हैं, जो घरों के बाहर रहती हैं। दिन ब दिन बढ़ रहे इनके आतंक से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। डलहौजी, डलहौजी छावनी, बनीखेत, पुखरी ढलोग बगढार रोहला, रूलयानी, कोठा एवं बाथरी एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में बंदरों का आतंक इस तरह व्याप्त है कि लोगों को घर से निकलने पर डंडे इत्यादि हाथों में लेने पड़ते हैं।