कुल्लू में अनूठी परंपरा, पर्यावरण रहे हरा-भरा
कुल्लू जिले में पर्यावरण संरक्षण की एक ऐसी अनूठी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है, जो सबके लिए नजीर बन गई है। शुरुआत राउगी पंचायत से हुई और धीरे-धीरे जिले की तकरीबन सभी पंचायतें पर्यावरण के प्रति संजीदा हो गईं। राउगी के लोगों ने सबसे पहले यह प्रण लिया कि यदि गांव में किसी स्वजन की मृत्यु हो जाए तो उसके उपरांत घर के लोग मिल-जुलकर पौधरोपण करेंगे। यह प्रण एक किस्म से आदेश जैसा ही मान्य हो गया। लोगों ने भी शिद्दत के साथ इसे परंपरा मान लिया और अब जब भी गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो शोकाकुल परिवार के सदस्य स्वेच्छा से पौधरोपण कर रहे हैं। पेड़ कटान पर पाबंदी बुजुर्ग पुने राम बताते हैं कि एक पौधा लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन एक से अधिक पौधे भी लगा सकते हैं। पेड़ की देखभाल परिवार ही करता है। पेड़ के साथ ही थड़ी में मृतक का नाम लिखा जाता है। पेड़ कटान पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, अगर कोई काटता है तो संबंधित परिवार के अनुसार उस पर कार्रवाई होती है। कराड़सू पंचायत के बीडीसी सदस्य खेख राम ठाकुर और संजीव ठाकुर, मेघ सिंह, बजीर, धनी देवी, दुर्गी देवी व उत्तमी देवी के अनुसार, गांव में जिस भी व्यक्ति की मौत होती है, उसकी यादगार के तौर पर गांव में रास्ते की मर्मत रास्ते में थड़ी भी बनाया जाता है, साथ ही पौधा भी लगाया जाता है।
स्वजन की मौत पर पौधरोपण व विश्राम स्थल
जिले की खराहल घाटी की राउगी, कराड़सू व सोयल पंचायत में यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। तीनों पंचायतों के मझधारी, खलटू, फशणी सोयल, कोटाधार, सौर, तांदला, विष्टबेहड़, पधरू गांव में पौधरोपण की परंपरा कायम हो चुकी है। वहीं, देखादेखी में अब लगघाटी सहित जिले की और पंचायतें भी इस परंपरा का निर्वहन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं। खराहल घाटी में स्वजन की मौत के एक साल के भीतर गांव में कच्चे रास्तों भी बनाए जा रहे हैं और उनकी मर्मत भी की जा रही है। इसके अलावा कच्ची या पक्की थड़ी (विश्राम स्थल) का निर्माण भी वह करते हैं।
कार्य पूर्ण न होने तक गांव में रहता शोक
जब तक स्वजन गांव में रास्तों की मर्मत और थड़ी का निर्माण नहीं करते, तब तक गांव में शोक रहता है। ग्रामीण देव कारज के अलावा किसी अन्य समारोह में खुशियां नहीं मनाते। महिलाएं तब तक बिंदी नहीं लगाती तथा पुरुष की टोपी पर फूल नहीं लगता। थड़ी के साथ ही फलदार व अन्य पौधे भी रोपित किए जाते हैं, ताकि उस रास्ते से बोझा उठाकर आने वाला व्यक्ति थड़ी पर आराम कर सके।
स्वजन की स्मृति में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना सराहनीय कार्य है। ग्रामीण बधाई के पात्र हैं। सभी लोगों से अपील है खुद भी पौधरोपण करें और दूसरों को भी जागरूक करें। -किशन लाल, ग्रीनमैन एवं प्रसिद्ध पर्यावरणविद