भगवान की शक्ति से हुई संसार की उत्पत्ति: कुमार स्वामी
ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण नहीं होते तो संसार ही नहीं होता। भगवान द्वारा ही सृष्टि का निर्माण किया गया है। भगवान हर कण में विद्यमान हैं। उनके नाम का स्मरण संसार का प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग तरीके से करता है। वह शक्ति एक है जिसके नाम अनेक हैं। कुुछ भी पुकार लो सर्वशक्ति एक ही श्री हरि ही हैं। ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी सोमवार को ऊना के कोटलाकलां बाबा बाल आश्रम में प्रवचन कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने बहडाला में दुख निवारण समागम में भी श्रद्धालुओं को संदेश दिया। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने भाव से स्पष्ट कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, परंतु भगवान उसका वध कर देते हैं। इसी प्रकार कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं, परंतु भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं और गोवर्धन की पूजा करने के लिए कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं और गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं। इसे देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देखकर भगवान श्रीकृष्ण कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी लोगों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया।
संत बाबा बाल को मिलेगा विश्व संत का स्मान
ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी ने कहा कि संत बाबा बाल जी संसार के कल्याण के लिए बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं। इनकी उपाधि केवल राष्ट्रीय संत की नहीं बल्कि विश्व स्तरीय संत की हो गई है। इसके लिए मान्यता दिए जाने की स्वयं उन्होंने अमेरिका में पहल की है। जल्द ही संत बाबा बाल जी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतों की श्रेणी में शुमार होने जा रहे हैं।