हिमाचल में सूखे से भड़की आग, धधक रहे जंगल
हिमाचल प्रदेश में हर साल जंगलों में आगजनी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सूखे का डंक आग भड़काने का काम कर रहा है। जून माह को आगजनी के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील महीना माना जाता है, मगर जलवायु परिवर्तन से दिसंबर से मार्च तक भी अब जंगल धधकने लगे हैं। रिहायशी मकान तक चपेट में आ रहे हैं, जिसमें करोड़ों रुपए की निजी एवं सार्वजनिक संपत्ति स्वाह हो रही है। गौरतलब है कि 600 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र अत्यधिक अग्नि ग्रसित श्रेणी में आता है, जबकि 305 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र उससे कम और 999 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र मध्य भाग श्रेणी में तथा 4131 वर्ग किलोमीटर उससे भी कम श्रेणी में आता है। देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण से पता चला है कि नवंबर 2022 से जून 2023 तक 704, जबकि नवंबर 2023 से जून 2024 तक 10,136 आगजनी की घटनाएं घट चुकी हैं। साल 2023-24 व 25 के शुरुआती माह में आगजनी के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, प्रतिशतता के हिसाब से आंकें, तो 1,450 फीसदी के तहत चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आग से वन्यजीवों के आवास भी प्रभावित हो रहे हैं। कई वन्य जीव प्रजातियां विलुप्त होने के कारण पर पहुंच गई हैं। कुछ विशेष प्रकार के जंगली पशु और पक्षी भी पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, आसमानी बिजली गिरने से आग की घटनाएं बढ़ रही हैं।
बजट सत्र में सामने आएंगे तथ्य
आगामी 10 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में अभी तक हुई आगजनी की स्थिति के तथ्य सामने आएंगे। हालांकि, केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह इस बाबत राज्यसभा कार्रवाई के दौरान अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं और उन्होंने उपरोक्त सर्वेक्षण को सभा पटल पर रखा था।
वन विभाग ने चौकन्ना किया अग्निशमन बल
प्रदेश वन विभाग ने भी माना है कि पिछले दो साल से जंगल की आग में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है, जिसको देखते हुए उनकी तरफ से फायर वाउचर तैनात किए गए हैं। अग्निशमन बल को पूरी तरह से चौकन्ना रखा गया है। वहीं, उपग्रह प्रणाली की मदद से अग्नि चेतावनियां फायर अलर्ट देना भी शामिल है। वनों में आग की जानकारी देने के लिए ऑब्जर्वेशन पोस्ट का गठन किया है। संवेदनशील वन क्षेत्र में ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा वनों को आग से बचाने के लिए स्वयंसेवकों व गैर सरकारी संगठनों का भी पंजीकरण किया गया है जो आग रोकने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।