कानून मंत्रालय ने जेपीसी को सौंपी 18000 पन्नों की रिपोट
देश में लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले दो विधेयकों पर विचार करने के लिए गठित 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बुधवार को पहली बैठक हुई। भाजपा के सदस्यों ने एक देश एक चुनाव के विचार की सराहना की, तो विपक्षी सदस्यों ने कई सवाल खड़े किए। वहीं, कानून मंत्रालय ने 18 हजार पेज का प्रेजेंटेशन दिया। एलजेपी की सांसद शांभवी चौधरी और बीजेपी के सांसद सीएम रमेश बैठक में व्यक्तिगत वजहों की वजह से शामिल नहीं हुए। बैठक में एक देश एक चुनाव से संबंधित विधेयक के प्रावधानों को समिति के सदस्यों के सामने रखा गया, साथ ही इसके प्रावधानों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक में विधेयक के समर्थन में इसकी जरूरत और पूर्व में दी गई विभिन्न सिफारिशों को भी समिति के सामने रखा गया। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024' और उससे जुड़े 'संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024' पर विचार के लिए संसद की 39 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है।
विपक्ष ने किया जमकर विरोध
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस बिल को संविधान की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की साजिश रच रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने पूछा कि खर्चा कम करना जरूरी है या लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
पीपी चौधरी को बनाया है समिति का अध्यक्ष
भाजपा सांसद पीपी चौधरी को जेपीसी का अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा, पूर्व केद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पुरुषोत्तम रूपाला, मनीष तिवारी, सांसद प्रियंका गांधी, बांसुरी स्वराज और संबित पात्रा भी इस समिति के सदस्य हैं। समिति में 27 सदस्य लोकसभा और 12 सदस्य राज्यसभा से हैं।
समिति विधेयक की निष्पक्ष जांच करेगी
भाजपा नेता पीपी चौधरी ने कहा कि जेपीसी विधेयक की निष्पक्ष तरीके से जांच करेगी।संसदीय पैनल इस मामले में प्रत्येक हितधारक की बात सुनेगा। हमारा प्रयास हर क्षेत्र के लोगों चाहे वह राजनीतिक दलों से हो या नागरिक समाज से हो या न्यायपालिका से सभी की बात सुनना होगा। हम सभी का इनपुट लेना चाहते हैं। हम सरकार की तरफ से पेश किए गए विधेयकों का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण करेंगे।