हिमाचल को जानने फोटो गैलरी पहुंचे नालन पाठशाला के विद्यार्थी, बोले यह है अभूतपूर्व
सुंदरनगर उपमंडल के तहत आने वाली जिला मंडी की राजकीय उच्च पाठशाला नालन के 37 विद्यार्थी तीन शिक्षकों के साथ गुरुवार को मंडी कुल्लू मार्ग पर मंडी से चार किलोमीटर दूर बिंदरावणी स्थित हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी पहुंचे तथा उन्होंने हिमाचल के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इन विद्यार्थियों ने हिमाचल प्रदेश को हर पहलू से कुछ ही पलों में एक ही छत के नीचे देखा और उपयोगी जानकारी हासिल की। इनका कहना था कि उनके शैक्षणिक भ्रमण में यहां उन्हें पूरे प्रदेश की ऐसी जानकारी हासिल हो गई है, प्रदेश के प्राचीन मंदिरों, कुदरती झीलों, किलों, स्मारकों, नदियों, झरनों, विकास, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय क्षेत्रों के साथ साथ दुर्गम क्षेत्रों के लोक जीवन, मेलों, त्योहारों, उल्लासमय व कठिन जनजीवन की जानकारी मिली। साथ ही विद्यार्थी ने गैलरी परिसर में स्थापित किए गए प्राचीन वस्तुओं पर आधारित म्यूजियम व प्राचीन बरसेलों को भी बेहद उत्सुकता व गहनता के साथ अवलोकित किया। गैलरी में अटेंडेंट आरती चौधरी ने विद्यार्थियों को बताया कि यह गैलरी आने वाले 24 अप्रैल को अपनी स्थापना के 28 साल पूरे करके 29 वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इसे निशुल्क दिखाया जाता है और अब तक देश विदेश व प्रदेश भर से यहां पर पांच लाख से अधिक लोग आ चुके हैं। एक बार यह फोटो गैलरी वर्ष 2026 में कीरतपुर मनाली मार्ग की जद में आने जाने के कारण विस्थापन का दंश भी झेल चुकी है मगर छायाकार हिमाचल गौरव बीरबल शर्मा के अथक प्रयासों से इसे फिर से स्थापित कर दिया गया। अब फिर से पठानकोट मंडी फोरलेन के लिए इसका अधिग्रहण कर लिया गया है। ऐसे में बीरबल शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार, मंडी जिला प्रशासन व भाषा एवं संस्कृति विभाग से आग्रह किया है कि इस दुर्लभ गैलरी, इसके म्युजिम, बरसेलों व अन्य प्राचीन इतिहास को दर्शाने वाली वस्तुओं को मंडी में ही किसी उचित स्थान पर संग्रहित करने के लिए ले लिया जाए। वह इसे निशुल्क देने को तैयार हैं मगर शर्त यही है कि ये सब मंडी शहर में ही रहना चाहिए क्योंकि प्रदेश के शिमला, कांगड़ा व चंबा में तो सरकारी क्षेत्र में संग्रहालय चल रहे हैं मगर प्रदेश के मध्य भाग मंडी में ऐसा कुछ नहीं है। संग्रहालय के आए स्कूली विद्यार्थियों व शिक्षकों ने इसे अभूतपूर्व करार देते हुए इसे प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर संरक्षित करने का आग्रह सरकार से किया है।