सेरी बंगलो के चरटुदढ़ की विराजी है गढ़ाकोडी माता: अलौकिक शांति स्थल पर देवी के पास शक्तियां अर्जित करने पहुंचते हैं नाग धमुनी
करसोग के सेरी बंगलो नामक स्थान पर सेरी मंदिर से थोड़ी दूर पश्चिमोत्तर दिशा में स्थित चरटुदढ़ में आदिशक्ति पारस्वरूपा महामाया का प्राचीन मंदिर एक अलौकिक शांति स्थल है। जनश्रुतियों के अनुसार 765 ई. में सुकेत संस्थापक राजा वीरसेन ने इस मंदिर की स्थापना की थी। सुकेत रियासत के अंतर्गत यह क्षेत्र कभी रामगढ़ के नाम से जाना जाता था। नैणसागर इस गढ़ का पालसरा था। नैणसागर लोगों से मनमानी वेगार करवाता तथा कर लगाकर लोगों को लूटता था। कर न देने पर कठोर सजाएं व मृत्युदंड देता था। यहां ब्राह्मणों ने देवी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की, स्तुति से प्रसन्न होकर देवी प्रसन्न हुई और अन्याय का नाश करने का आशीर्वाद दिया। थोड़े ही समय में यहां देवी के कोप से इस गढ़ पर भयंकर बज्रपात हुआ। सात दिन तक भयंकर बरसात होने से संपूर्ण गढ़ वाला टिल्ला ध्वस्त हो गया। एक अन्य जनश्रुति के अनुसार विजन नामक ब्राह्मण इस मंदिर में पूजा करता था। मां काली की कृपा से विजन के वंश वृद्धि हुई। सुकेत के राजा ने विजन को रहने के लिए वगैण नामक गांव दान किया। यही ब्राह्मण परिवार आज भी गढ़ाकोडी माता के पुजारी हैं। मंदिर के गर्भगृह में बेहद शक्तिशाली महिषासुरमर्दिनी, प्रचंड धूमावती, श्रीगणेश के श्री विग्रह पूज्य हैं।
सेरी बंगलो में देवर्षि नारद मुनि का मंदिर भी है। यहीं नाग धमुनी का मंदिर भी है। गौर हो कि नाग धमुनी वर्ष में एक बार महामाया के प्राचीन स्थान पर आकर लोक कल्याण के लिए शक्तियां अर्जित करते हैं। देवदारों के पेड़ों से घिरा यह मंदिर अनायास ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि आसमान बहुत नीचे है।