रेणुका बांध परियोजना में तीन सुरंगों के डिजाइन को सीडब्ल्यूसी की मंजूरी
राष्ट्रीय महत्व की रेणुका बांध परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। केंद्रीय जल आयोग ने परियोजना से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण डायवर्जन सुरंगों (टनलों) के डिजाइन को अंतिम रूप देकर स्वीकृति दे दी है। अब इन सुरंगों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि मई 2025 के अंतिम सप्ताह तक टेंडर आमंत्रित किए जा सकते हैं। तीन सुरंगें होंगी डेढ़-डेढ़ किलोमीटर लंबी परियोजना के प्रारंभिक चरण में तीन सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनकी लंबाई लगभग 1,500 मीटर (1.5 किलोमीटर) होगी। इन सुरंगों का उद्देश्य बांध के पानी के बहाव को नियंत्रित करने और निर्माण के दौरान डायवर्जन का कार्य करना है। रेणुका बांध परियोजना के लिए सीडब्ल्यूसी को मुख्य परामर्शदाता नियुक्त किया गया है। उनके निर्देशों के अनुसार ही पूरी निर्माण प्रक्रिया चलेगी। इससे पहले 23 जनवरी को सीडब्ल्यूसी सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञ टीम ने ददाहू में बांध स्थल का निरीक्षण किया था और स्थल की भौगोलिक व तकनीकी जांच की थी सीडब्ल्यूसी द्वारा अनुमोदित नक्शों के आधार पर अब सुरंगों के निर्माण की अनुमानित लागत तैयार की जा रही है, ताकि टेंडर की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके। पॉवर कॉर्पोरेशन के निदेशक एस.के. चौधरी ने बताया कि डिजाइन का रिव्यू किया जा रहा है ताकि टेंडर के समय कोई तकनीकी खामी न रहा। रेणुका बांध परियोजना न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और बिजली उत्पादन के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। परियोजना के सफल क्रियान्वयन से हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों को भी लाभ होगा, साथ ही हिमाचल में रोजगार और विकास के नए अवसर उत्पन्न होंगे।