मजदूरों के कल्याण पर इस साल बोर्ड का तीस प्रतिशत बजट ही हुआ खर्च-भूपेंद्र
हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की बैठक गत दिवस शिमला में नरदेव सिंह कवंर की अध्यक्षता में हुई जिसमें अगले वित्त वर्ष के लिए 207 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया।जिसमें से 160 करोड़ रुपये मज़दूरों की सहायता के लिए तथा अन्य मद्दों के लिए रखे गए हैं।लेकिन गत तीन वर्षों की एक लाख सात हज़ार मज़दूरों की 500 करोड़ रुपये की देनदारियां अभी लंबित है और वर्तमान में बोर्ड के पास 1200 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बाद भी मज़दूरों को अदा नहीं हो रही है। वर्ष 23-24 में 26.79 करोड़ 24-25 में 33 करोड़ ही ख़र्च हुये हैं जबकि प्रावधान एक सौ बीस करोड़ प्रत्येक वर्ष में रखा गया था।इसके बारे बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य व सीटू के मंडी ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वे मजदूरों की सहायता राशी जल्दी जारी करने बारे पिछली तीन बैठकों से मुद्दा उठा रहे हैं और पिछली बोर्ड बैठक में इस बैठक तक पचास प्रतिशत पेंडेंसी किलीयर करने का फैसला हुआ था लेकिन इस बैठक तक मात्र 1872 मज़दूरों को 6.76 करोड़ रुपये की सहायता ही जारी हुई है जबकि एक लाख से ज़्यादा मज़दूरों की सहायता लंबित है।भूपेंद्र सिंह ने ये मुद्दा बोर्ड बैठक में उठाया और लंबी बहस के बाद बोर्ड अध्य्क्ष ने बोर्ड ऑफिस हमीरपुर शिफ्ट होने के कारण अगली बैठक तक मज़दूरों कि सहायता राशी जारी करने का आश्वाशन दिया है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बोर्ड के विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों के 51 पद खाली पड़े हैं और सरकाघाट ऑफ़िस जो धर्मपुर व गोपालपुर खण्डों के 30 हज़ार मजदूरों के लिए स्थापित है यहां पर दो साल से मोटिवेटर नहीं है। अगर 31 मार्च तक यहां पर मोटीवेटर न लगाया गया तो इसके लिए सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। भूपेंद्र सिंह ने बैठक में सरकाघाट ऑफिस में धर्मपुर और गोपालपुर खण्डों के लिए अलग अलग दो मोटीवेटर लगाने की मांग की है।उन्होंने साप्ताहिक आधार पर संधोल, धर्मपुर, टिहरा, मंडप, ब्लड़वाड़ा और भद्रवाड़ में कैम्प ऑफ़िस/शिविर आयोजित करने की भी मांग उठाई है।वर्तमान में इकेवाईसी वाले मज़दूरों के आवेदन ही स्वीकार किये जा रहे हैं लेक़िन इकेवाईसी की स्थिति प्रदेश में पंजीकृत कुल 4.56 लाख मज़दूरों जिनमें से 2.54 लाख मज़दूर ही एक्टिव मज़दूर हैं और उनमें से अभी तक 41 हज़ार की ही इकेवाईसी हुई है।इस बारे बोर्ड ने इकेवाईसी करने के लिए अब हिमपरिवार एजेंसी द्धारा अगले तीन महीने में सभी मज़दूरों की इकेवाईसी करने का ठेका दिया गया है।जो पँचायत स्तर पर इस काम को करेगी।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि बोर्ड मज़दूरों के कल्याण पर कम और गाड़ियों, वेतन भतों व प्रचार प्रसार पर ज़्यादा ख़र्च कर रहा है और इस साल प्रशसनिक ख़र्च 34 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि मजदूरों के कल्याण पर ये राशि 25 करोड़ रुपये के आसपास ही है जो क़ानून के विपरीत है।अगर अगली बैठक तक इसमें सुधार नहीं किया गया तो सीटू हाई कोर्ट में मामला दर्ज करेगी और बोर्ड के नए कार्यालय हमीरपुर में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।उन्होंने कहा कि गाड़ियों पर 80 लाख रुपए खर्च कर दिए गए और बोर्ड से गाड़ियां लेबर ऑफिसरों को दो साल से इस्तेमाल करने के लिए दी गई है जबकि अब बोर्ड ने अपने श्रम कल्याण अधिकारी नियुक्त किए हैं ।सरकाघाट सब ऑफिस के अंतर्गत 2017 से पहले स्वीकृत 304 सोलर लैम्प 232 इंडक्शन हीटर और 15 वाशिंग मशीनें मज़दूरों को बांटी नहीं जा रही है जिसके लिए कई बार चेयरमैन व बोर्ड में मुद्दा उठाया गया।इसके अलावा जो मनरेगा निर्माण मज़दूर बोर्ड के एक निर्णय के कारण आवेदन नहीं कर पाये थे उन्हें एक वर्ष अतिरिक्त समय देने का भी निर्णय लिया गया।उन्होंने बताया कि अप्रैल में बोर्ड के चेयरमैन सरकाघाट आएंगे और निर्माण मज़दूरों के सम्मेलन में भाग लेंगे।बैठक में आउटसोर्स आधार पर पिछले दस साल से काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने का भी प्रस्ताव ट्रेड यूनियनों ने रखा।












