25 साल से कुछ दुकानदारों ने किराये पर मारी कुंडली
पंचायत समिति हमीरपुर की तकरीबन दो दर्जन दुकानें किराये के हेर-फेर में ऐसी फंसी हुई हैं, जिस कारण समिति को हर साल लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। कारण यह है कि कई ऐसे भी किराएदार हैं, जो पिछले 25 साल से किराया नहीं दे रहे हैं और जो किराया दे रहे हैं उनका किराया बहुत कम है। कुछ दुकानों की बोली अब होने वाली है, लेकिन असलियत यह है कि लापरवाही की वजह से किराएदारों ने समिति को किराया देना ही बंद कर दिया है। शहर के मुख्य बाजार में स्थित इन दुकानों की यदि बोली हो जाए, तो समिति के राजस्व में सालाना लाखों रुपए का फायदा होगा। लेकिन इसकी जहमत उठाएगा कौन? ब्लॉक ऑफिस के पास से इन दुकानों का किराया शुरू होता है। यहां कुछ दुकानों का किराया 4000 रुपए तय किया गया है, लेकिन वास्तव में वह दुकानें व्यापारिक दृष्टि से कई गुणा ज्यादा किराये की वसूली की हकदार हैं। मुख्य बाजार में भी कई दुकानें हैं, लेकिन कुछ दुकानदार इनका 600 रुपए किराया भी नहीं दे रहे हैं। बता दें कि आज की मार्केट वैल्यू के हिसाब से कई गुणा ज्यादा होगा। लेकिन पंचायत समिति अपनी इस प्रॉपर्टी को संभालने में असरदार साबित नहीं हुई है। जवाबदेही से उसने मुंह फेर के रखा है। नहीं तो लाखों रुपए की इनकम हर महीने होती। सूत्रों के मुताबिक अब समिति ने दुकानों की असेस्मेंट सरकारी रेट पर करने के लिए जिम्मेदारी उठाई है। इस पर अमलीजामा कब पहनाया जाएगा इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा होता है तो किराये में अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी। क्योंकि जहां पर इन दुकानों का किराया केवल नाममात्र है, वहां से कई गुणा ज्यादा किराये पर दुकानें चढ़ी हुई हैं।
कुछ दुकानों की बोली 16 मार्च को
डांग कवाली के मुहाने पर स्थित कुछ दुकानों की बोली 16 मार्च को तय की गई है। समिति इन्हें नीलामी के जरिए किराये पर देगी। अब देखना है कि यदि इन दुकानों की बोली अच्छी खासी होती है, तो शहर की अन्य दुकानों की बोली क्यों नहीं हो सकती। क्योंकि यह संपत्ति संबंधित किराएदारों को ना तो लीज पर दी गई है और ना ही बेची है। इसलिए किराया तो समय के लिहाज से अदला-बदली करके फिक्स होना ही चाहिए।
"कुछ दुकानदारों को नोटिस भेजे गए हैं उसके जवाब आ रहे हैं, लेकिन कुछ पुराने रिकॉर्ड नहीं मिल रहे हैं, जिसकी जांच की जा रही है। 25 साल से कई लोगों ने किराया ही नहीं दिया है और कुछ दुकानों का किराया 4000 तय किया गया है। अब तमाम दुकानों की असेस्मेंट किराये के लिए करवाई जाएगी। उसी हिसाब से बोली लगाई जाएगी। सरकारी प्रॉपर्टी है, लेकिन आज तक ऐसे कैसे होता रहा, इस पर हैरानी हो रही है। कुछ किराएदार एफिडेविट बनवा रहे हैं, ताकि उनका किराया सिस्टम से चलाया जा सके।
हरीश शर्मा, अध्यक्ष, पंचायत समिति हमीरपुर।"












