सुंदरनगर के कुश्ती अखाड़े में बाहर से लाकर डाली जा रही मिट्टी
नगौण खड्ड जिसे लिंडडी खड्ड भी कहते हैं, यहां सुंदरनगर मेले के अखाड़े को लेकर तरह तरह की बातें करना स्वाभाविक सी बात है। कहा जा रहा है कि पूर्व में यहीं पर खुदाई करके अखाड़ा तैयार किया जाता रहा है, मगर अब आधुनिक समय में बाहर से मिट्टी लाई जाती है, जिसमें अजीब सी गंध होती है वहीं मिट्टी में काफी मात्रा में सिल्ट भी मिली होती है, जो पहलवानों की नजर को यानी आंख कान आदि में इसके चमकदार तिनके -कण घुसकर पीड़ा पैदा कर सकते हैं। ऐसे में यहां स्वच्छता का बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है तथा अखाड़े को अखाड़े की भांति किसी विशेषज्ञ की देखरेख में तैयार करना न के बराबर लगता है, जिससे पहलवानों को कई तरह का नुकसान हो सकता है। बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि अखाड़े को परंपरागत तरीके से तैयार नहीं किया जा रहा है, जबकि छिंज एवं कुश्ती के मौके पर तो बाबूगिरी करने वाले कई लोग बड़ी बड़ी बातें करते नहीं थकते। यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि अखाड़े का काम करते समय संबंधित कमेटी के प्रमुख आदि मौके पर मौजूद नहीं रहते, जो छिंज के देवता लखदाता पीर का भी घोर अपमान है। लोगों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि अखाड़े का बड़े पैमाने पर सुधार किया जाए।












