जोगिंद्रनगर में तिब्बत की आजादी के लिए गूंजे नारे, सैकड़ों तिब्बतियों ने किया प्रदर्शन
जोगिंद्रनगर सोमवार को तिब्बती समुदाय ने सोमवार को जोगिंद्रनगर में चीन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और तिब्बत की आजादी के लिए आवाज बुलंद की। चौंतड़ा से जोगिंद्रनगर बाजार तक तिब्बती नागरिकों ने रैली निकालकर विरोध जताया और रामलीला मैदान में सभा का आयोजन किया। रैली के समापन पर रामलीला मैदान में एक सभा हुई, जहां प्रदेश प्रवक्ता पंकज जम्वाल का स्वागत किया गया। उन्हें शाल, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस की औपचारिक शुरुआत की गई। तिब्बती समुदाय ने उन लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की, जिन्होंने तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह किया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बतियों को बुनियादी सुविधाओं और मानवाधिकारों से वंचित कर दिया गया है। सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता पंकज जम्वाल ने कहा, "तिब्बत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्णय का प्रतीक है। तिब्बत की आजादी केवल तिब्बती समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जीत होगी। चीन के दमन के खिलाफ हमारा समर्थन हमेशा तिब्बतियों के साथ रहेगा।" उन्होंने कहा कि तिब्बती संघर्ष शांतिपूर्ण और न्यायसंगत है, जिसे दुनिया को सुनना चाहिए और समर्थन देना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 10 मार्च 1959 को तिब्बती जनता ने चीन के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया था। उसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 10 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है। इस बार 66वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस पर तिब्बती समुदाय ने अपनी आज़ादी की मांग दोहराई और चीन की नीतियों की आलोचना की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि तिब्बत में अब भी लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का अधिकार नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि तिब्बत की आजादी के लिए समर्थन दिया जाए और चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई जाए।












