सेपू बड़ी के जनक मुकुंद बोटी: छह दशक पहले किया था अनोखा प्रयोग, पीएम मोदी भी हुए मुरीद
जो सेपू बड़ी प्रधानमंत्री मोदी को भाई, वो 6 दशक पहले मंडी के मुकुंद बोटी ने बनाई है। प्रधानमंत्री जब भी मंडी आते हैं तो सेपू बड़ी का जिक्र करना नहीं भूलते हैं और यही नहीं मंडी दौरे के दौरान सेपू बड़ी पैक करवा उन्हें खिलाई जाती है। आज इसी सेपू बड़ी को बनाने वाले मुकुंद बोटी के बारे में दैनिक अनंत ज्ञान के प्रबुद्ध पाठकों को बताएंगे।
आज भी क्षेत्रवासियों के जहन में जैसे ही मुकुंद राम शर्मा का नाम आता है तो उनका मन मंडयाली धाम के लिए मचलने लगता है। शायद ही ऐसा कोई मंडयाल होगा जिसने इनके हाथों से बनी धाम के व्यंजनों का स्वाद न लिया हो। पाककला के चाणक्य मुकुंद राम शर्मा न केवल पाककला में ही पारांगत हैं बल्कि पहाड़ी कविता लेखन में भी उनका कोई मुकाबला नहीं है। मुकुंद राम शर्मा ने बताया कि मैं सप्ताह में कम से कम दो कविताएं जरूर लिखता हूं और साल में लगभग 100 कविताएं हो जाती हैं। मंडी शहर के हर स्कूल, व्यक्ति विशेष और मंदिर, पुल, यात्रा विवरण व उत्सव आदि की वह बैठे-बैठे ही कविताएं बना देते हैं और उन्हें कागज पर उकेर लैमिनेट करवा कर संबंधित पक्ष को निशुल्क भेंट करते हैं। कविता लेखन का उनके पास गजब का हुनर है, उनका एक-एक शब्द घटना को यूं बयां करता है जैसे दृश्य आंखों के सामने प्रस्तुत हो रहे हैं। 94 वर्ष की उम्र में भी वह सप्ताह में चार बार तीन किलोमीटर पैदल चल कर बाजार आते हैं और अपने संगे संबंधियों से मिलते हैं। सन् 1995 से लेकर वर्ष 2004 तक वह लोगों को अपने हाथों से मंडयाली धाम परोसते रहे, लेकिन इसके बाद
पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया था नौकरी का न्योता
प्रदेश के लगभग सभी मुख्यमंत्रियों को वह अपने हाथों से खाना खिला चुके हैं। एक समय था जब मुकुंद राम शर्मा से धाम बनवाने के लिए एक साल पहले तारीख मुकर्रर करवानी पड़ती थी तब जाकर उन्हें धाम के लाजवाब व्यंजनों को खाने का अवसर मिलता था। पूर्व मुख्यमंत्री डा. परमार, शांता कुमार, वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल से लेकर वर्तमान सी.एम. जयराम ठाकुर तक को अपने पाककला के हुनर से अवगत करवा चुके हैं। एक बार पूर्व मुख्यमंत्री डा. परमार इनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने टूरिज्म डिपार्टमेंट में डायरेक्ट सरकारी नौकरी देने का वादा कर दिया, लेकिन मुकुंद राम शर्मा आम जनता के ही बीच रहना चाहते थे।
विदेशों में भी हो रही एक्सपोर्ट
लगभग 6 दशक पहले मुकुंद राम शर्मा ने पहाड़ी व्यंजनों में बदलाव करने की ठानी और प्रयोग दर प्रयोग करने को आतुर हो गए। सेपू बड़ी 60 साल पहले मेदे की बनती थी, मुकुंद राम ने उस पर 10 बार प्रयोग किए और अंतत: सेपू बड़ी को माह के आटे से तैयार कर इतिहास रच दिया। सेपू बड़ी को मुकुंद बड़ी के नाम से भी जाना जाता है, जो अब विदेशों में भी एक्सपोर्ट हो रही है। मुकुंद राम शर्मा प्रदेश के दो जिलों हमीरपुर और लाहौल-स्पीति को छोड़ सभी जगह पाककला का उजियारा बिखेर चुके हैं। वर्तमान में इन्होंने दर्जनों लोगों को पहाड़ी व्यंजनों की लजीजता का मर्म समझाकर तैयार कर दिया है, जो लोगों को धामों में यादगार व्यंजन परोस रहे हैं।
"वर्षों पहले सेपू बड़ी को मैदे से तैयार किया जाता था, जिसे मैंने कई बार प्रयोग कर माह के आटे से बनाया और 10 प्रयासों के बाद यह मानकों पर खरी उतरी। ऐसे ही कांगणी भात, सौंख, मंडल आदि के अनाज भी बीमारियों में आज भी रामबाण है, इनको भी मैंने कई बार अलग तरह से पकाया और खिलाया है।"
-मुकुंद राम शर्मा, सेपू बड़ी के जनक, मंडी।












