कैंसर से बचाव में कारगर फेगड़े की सब्जी, शहर में बढ़ी मांग
विश्व भर में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां 6 ऋतुएं होती हैं और इन्हीं ऋतुओं के अनुसार खानपान का भी महत्व रहा है, जिसका पालन करने से बीमारियां नजदीक नहीं फड़कतीं। मौसम के अनुसार प्राकृतिक साग-सब्जियों का सेवन करने से कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिलता है। ऐसी ही एक सब्जी फेगड़े (भ्रूणी) है। फेगड़े न केवल पौष्टिक सब्जी है बल्कि इसमें बहुत से ऐसे तत्व हैं जो हमें कैंसर जैसे गंभीर रोगों से भी बचाते हैं। चौहट्टा बाजार में गांव से कुछ महिलाएं फेगड़े की सब्जी लाकर बेच रही हैं, जिसे मंडीवासियों ने हाथों-हाथ खरीद लिया। दूध युक्त इसके छोटे छोटे फलों की तासीर गर्म होती है और इसको वर्षभर में केवल 3 से 4 चार ही खाया जाता है। फेगड़े में मैगनीज व मैग्नीशियम जैसे तत्व होते हैं। मैगनीज एक ऐसा खनिज है, जिसकी मनुष्य के शरीर को कम मात्रा में आवश्यकता होती है, लेकिन फिर भी इसकी उपयोगिता शरीर के लिए अधिक है। मनुष्य के शरीर में अधिकतम 20 मिलीग्राम मैगनीज होता है, जो शरीर के विभिन्न भागों जैसे लिवर, किडनी व हड्डियों में पाया जाता है। यह शरीर की कार्यप्रणाली के सुचारू रूप से काम करने के लिए बेहद जरूरी है। मैगनीज थायराइड के विकारों को नष्ट करता है और तंदुरुस्त बनाता है।
क्या काम करता है मैगनीज, मैग्नीशियम
फेगड़े में पाए जाने वाला मैगनीज हड्डियों को मजबूत बनाता है और रक्त को शुद्ध कर मधुमेह जैसी बीमारी से लड़ने की ताकत देता है। यह मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी में भी लाभकारी है। महिलाओं में सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को दूर करने व मैगनीज सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज स्तर को बढ़ाकर मोच का उपचार करने में भी सहायक होता है। वहीं मैग्नीशियम शरीर में कैल्शियम, पोटाशियम और जिंक जैसे अन्य खनिजों का स्तर बनाए रखने में मदद करता है। दिल और गुर्दों को ठीक से काम करने में मदद करता है।
कैसे बनाएं फेगड़े की सब्जी
फेगड़े को हल्के मुलायम पत्तों के साथ पेड़ से निकाला जाता है और फिर इनको उबाला जाता है। उसके बाद इसे अन्य सब्जियों की तरह ही तड़का आदि लगाकर प्रयोग में लाया जाता है। जायका बदलने के लिए इसमें दही या छाछ भी लगाई जा सकती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
मेडिकल ऑफिसर जोनल अस्पताल मंडी के डॉ. दुष्यंत ठाकुर का कहना है कि इसमें मैगनीज और मैग्नीशियम खनिज पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। यह बीमारियों से लड़ने में काफी मदद करता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाना भी हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि यह ऋतुफल के रूप में खाने योग्य है, जिसे प्राचीन समय से ही मनुष्य खाता आ रहा है।












