लारजी बांध हादसा: दो छात्रों की मौत से शोक की लहर, प्रशासन और आईटीआई प्रबंधन पर उठे सवाल
बीते कल लारजी बांध के समीप पिन पार्वती में डूबे 2 छात्रों की मौत से जहां समूचा बालीचौकी क्षेत्र सदमे में है वहीं दोनों छात्रों की मौत ने स्थानीय प्रशासन एवं आईटीआई थलौट के प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक घनश्याम के पिता दया राम ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को आईटीआई प्रबंधन के हवाले छोड़ रखा था। प्रबंधन की लापरवाही हमारे बच्चों के जीवन पर भारी पड़ गई। उन्होंने आईटीआई प्रबंधन की लापरवाही की जांच की भी मांग की है। वहीं विद्युत विभाग के स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि आईटीआई थलौट के 7 छात्र जॉब ट्रेनिंग के चलते विद्युत विभाग के लारजी उपमंडल के अधीन प्रशिक्षण ले रहे थे और इस दौरान बिहाली नामक स्थान पर इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा था। वीरवार को दोपहर बाद 2 बजे 3 छात्रों ने लंच करने की बात कही और इस दौरान कब वे नहाने चले गए किसी की पता ही नहीं चला। जानकारी के अनुसार इस दौरान 3 छात्रों में से एक ने पानी ठंडा होने की बात कही और नहाने से मना कर दिया लेकिन शेष दोनों छात्र गहरे पानी में चले गए और वापिस ही नहीं निकल पाए। इस दौरान आनन फानन में छात्रों को निकालने के प्रयास किए गए लेकिन गहरा पानी होने के चलते सफलता नहीं मिल पाई। परिजनों ने इस दौरान जब गोताखोरों की व्यवस्था करने का आग्रह किया तो उन्हें कहा गया कि प्रशासन व्यवस्था कर रहा है, लेकिन देर रात तक भी गोताखोर जब नहीं पहुंचे तो पोकलेन मशीन से पानी की दिशा बदलने का प्रयास किया गया जो विफल रहा। परिजनों का कहना है कि अगर प्रशासन गोताखोरों की व्यवस्था करवाता तो उनके बच्चों के शव वीरवार शाम को ही मिल जाने थे। शुक्रवार सुबह 6 बजे के आसपास गोताखोरों ने 10 मिनट से भी कम समय में डूबे छात्रों के शव निकाले। मृतक छात्रों की पहचान घनश्याम सुपुत्र दया राम निवासी काहरा व धर्मेंद्र पुत्र गीता नंद निवासी मुराह (दोनों की तहसील बाली चौकी) के रूप में हुई। वहीं शुक्रवार को दोनों छात्रों का बंजार अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया और शव परिजनों को सौंप दिए गए। स्थानीय विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दोनों छात्रों की मौत पर शोक व्यक्त किया है।












