बहरी में डंप लकड़ी की जांच पूरी, विधायक की पत्नी की कंपनी पर आरोप
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक के गांव बहरी में डंप की गई प्रतिबंधित और अप्रतिबंधित लकड़ी की जांच वन विभाग ने पूरी कर ली है, जिसमें कुल 5235 किविंटल लकड़ी रिपोर्ट के अनुसार वहां पाई गई है। जिसमें से 507 किविंटल लकड़ी प्रतिबंधित किस्म के पेड़ों की है जिसमें बरगद, तुन्नि, कचनार, बदारे, उमरे, आम, जामुन, कैंथ, ब्लोधर, खसरे, जापानी तूत और गावन इत्यादि पेड़ों की है और 1358 किविंटल ओई सिरस, सिंबल की है। पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह द्वारा आरटीआई से ली गई सूचना से यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार ये सारी लकड़ी कंपनी की निदेशक कविता शेखर द्वारा बनाई गई बहरी रीन्यूएबल एनर्जी कंपनी द्वारा लीज पर ली गई भूमि पर डंप की गई थी। यह सारी लकड़ी बिना वन विभाग की अनुमति के यहां लाने के लिए हुकम चंद निवासी धर्मपुर और बाबू राम निवासी खेलग-लौंगनी को दोषी पाया है और रिपोर्ट में उन्होंने ये सब कबूल भी किया है। जिन दो स्थानों पर ये लकड़ी डंप की गई थी वे बहरी रीन्यूएबल एनर्जी कंपनी ने लीज पर स्थानीय लोगों से ली है और यहां पर अस्थायी बालन लकड़ी का डीपो खोलने के लिए 27 नवंबर 2024 को वन विभाग को आवेदन किया है, लेकिन उसकी अनुमति अभी तक भी उन्हें नहीं मिली है। दिसंबर 22 को सकलाना ग्राम पंचायत के प्रधान सुरेंद्र कुमार द्वारा शिकायत दर्ज करवाने और व मीडिया में उछलने तथा विधानसभा व हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद 24 दिसंबर से जांच शुरू की गई थी जिसकी रिपोर्ट आ गई है। जांच के दौरान अब तक विभाग ने कंपनी की निदेशक कविता शेखर को इसके बारे में तीन नोटिस भेजे हैं, लेकिन उन्होंने एक का भी जवाब विभाग को नहीं दिया है। इस गैर कानूनी लकड़ी कटान की जांच के लिए विभाग ने एसीएफ जोगिंद्रनगर अश्वनी कुमार की अध्यक्षता में सात सदस्यों की जांच टीम गठित की थी, जिसने 10 मार्च 2025 को अपनी 15 बिंदुओं वाली पांच पृष्ठों की रिपोर्ट जमा करवा दी है। जांच रिपोर्ट में लिए गए बयान में राहुल पुत्र जगदीश चंद ने ब्यान किया है कि डंप की गई लकड़ी बहरी रीन्यूएबल एनर्जी कंपनी की है। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि निजी भूमि पर से पेड़ काटने व 4708 किविंटल लकड़ी यहां से बाहर ले जाने की अनुमति 20 लोगों को दी है, लेकिन उसमें से 3393 किविंटल ही बाहर गई है और 9 लोगों की लगभग 1314 किविंटल लकड़ी के पेड़ अभी भी उनकी भूमि पर ही है। लेकिन किसी भी व्यक्ति को बहरी लकड़ी ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। विभाग ने 53 लोगों की डैमेज रिपोर्ट दर्ज की है, जिन्होंने बिना अनुमति के अपनी भूमि से प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी काटी है। वन क्षेत्र अधिकारी धर्मपुर ने कबूल किया है कि डंप की गई लकड़ी विभाग द्वारा दिए परमिट से ज्यादा मौके पर 1842 किविंटल ज्यादा पाई गई है जिसे जब्त कर दिया गया है। पूर्व जिला पार्षद ने वन मंडल अधिकारी धर्मपुर व अन्य विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही व मिलीभगत के बारे में की गई कार्रवाई की भी जानकारी मांगी थी, लेकिन डीएफओ जोगिंद्रनगर ने इसे उच्च अधिकारियों द्वारा किए जाने के बहाने टाल दिया है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध विभाग व सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि ऐसे भी आरोप लगे हैं कि बहुत सी लकड़ी रातों रात यहां से उठा दी गई थी और हर कहीं फेंकी गई थी। अगर उसकी भी जांच हो तो ये अवैध कटान कहीं ज्यादा निकलेगा लेकिन सरकार व विभाग ने अभी तक न तो किसी अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की है और न ही मुख्यमंत्री ने अपने कथन के अनुसार कोई ठोस कदम उठाया है। इस बारे निष्पक्ष जांच व न्याय की उम्मीद अब केवल हाईकोर्ट से ही है।












