कलस्वाई में पांचवी पीढ़ी आने के बाद विभाग ने अवैध घोषित किए लोगों के घर-भूपेंद्र
धर्मपुर नगर पंचायत के कलस्वाई वार्ड में आज़ादी के पहले से बसे अनुसूचित जाति के एक दर्ज़न गरीब परिवारों के घरों को अवैध कब्ज़े वाले घर घोषित करने का अजीबोग़रीब कारनामा धर्मपुर के राजस्व विभाग ने किया है और इन परिवारों को वहां के हटने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं और हररोज़ इन्हें यहां से हटने के लिए हररोज दबाब डाला जा रहा है और उन्हें डराने धमकाया भी जा रहा है जिसका हिमाचल किसान सभा ने कड़ा विरोध किया है और मांग की है कि इन गरीब परिवारों को वहां से बेदखल करने के फ़ैसले को तुरंत बदला जाए और जारी नोटिस रद्द किए जायें।पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह व किसान सभा व भूमि बचाओ सँघर्ष समिति के सयोंजक अनिल कटवाल व सह संयोजक रंगीला राम ने प्रभावित परिवारों से गांव में जाकर मुलाकात की और उन्हें हर प्रकार की मदद करने और किसी भी सूरत में घर खाली न करने के लिए कहा कियूंकि अब सुप्रीम कोर्ट से इस प्रकार के कब्ज़ों से बेदख़ली पर रोक लग गई है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि ये सभी परिवार लगभग सौ साल पहले इनके बुजुर्ग पंजकू राम के चार बेटों और उनके आगे तीन और पीढ़ियों के हैं।पंजकू राम जो मूल रूप में धवाली पँचायत के रिछली गांव के निवासी थे और उन्हें उस समय यहां किसानों ने उन्हें कृषि उपकरण बनाने और घराट चलाने के लिए यहां बसाया था।ये सब परिवार लौहार का काम करते थे लेकिन अब जब इनकी वर्तमान में पांचवी पीढ़ी आ गई है तो अब विभाग इनके घरों को अवैध घोषित कर रहा है यही नहीं जो घराट ये चलाते थे उसकी कुहल भी कागज़ो में नहीं दर्शायी गयी है।यही नहीं कलस्वाई गांव जिसमें 3प-35 परिवार हैं जो नाले के साथ साथ बसे हैं राजस्व रिकॉर्ड में वे भी सरकारी भूमि पर बसे हैं और उन पर भी प्रशासन कभी भी अपना डंडा चला देगा। लेकिन वर्तमान में जिन परिवारों को नोटिस जारी हुए हैं उन्हें केंद्रीय विद्यालय परिसर बनाने के नाम पर अवैध घोषित किया गया है जो किसी भी तरह से जायज नहीं हैं। जब कुछ समय पहले राजस्व विभाग ने इन्हें नोटिस थमाए और मकान खाली करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया तो तब से ये सब सदमे में हैं।जिसके चलते कुछ परिवारों ने डर के कारण अपने घरों के साथ बनी गौशालाओं को तोड़ दिया और पाली गायों को भी बेच दिया है और यहां तक की जो पेड़ पौधे थे उन्हें भी काट दिया है। लेकिन मामला मीडिया में उजागर होने और किसान सभा द्वारा 6 मार्च को किये अधिवेशन में बेदख़ली के खिलाफ अभियान चलाने और विधानसभा शिमला पर 20 मार्च को प्रदर्शन करने और वहां पर इस मुद्दे को भी उठाने के बारे लिए निर्णय के बाद आज इन सभी प्रभावितों से कलस्वाई में जाकर मीटिंग की जिसमें निर्णय लिया गया कि अगले कल यानी 11 मार्च को इस बारे एसडीएम धर्मपुर को एक मांगपत्र दिया जायेगा और इन नोटिसों को रद्द करने की मांग की जायेगी।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इन परिवारों को प्रशासन ने वहां से हटने के आदेश तो जारी कर दिए लेक़िन वे जाएंगे कहाँ इसके बारे में कोई विकल्प नहीं दिया है।दूसरी तरफ स्थानीय विधायक ने भी यहां से गुज़रते हुए राजस्व विभाग को ये कहा कि इनके घरों को छोड़कर बाकी ज़मीन इनके कब्ज़े से ले ली जाये ताकि प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय यहां बन सके।इससे विधायक की इन परिवारों के प्रति मानसिकता भी उज़ागर हुई है और ये सब उनके इशारे पर ही हो रहा है।किसान सभा ने निर्णय लिया है कि वे इन परिवारों की ज़बरदस्ती बेदखली की शिकायत मानवाधिकार और अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में भी करेंगे और इन्हें स्कूल का भवन व परिसर बनाने के लिए उजाड़ने का विरोध किया जायेगा और जरूरत पड़ी तो इसके लिए सँघर्ष भी किया जाएगा। उन्होंने ये भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले हिमाचल प्रदेश में चल रही बेदखली की मुहिम पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी है जिसके कारण भी राजस्व विभाग के कर्मचारी इन परिवारों को यहां से हटने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। इसलिए इनको जारी नोटिसों को रद्द करने लिए धर्मपुर के प्रशासन व विधायक को जल्दी निर्णय लेने की जरूरत है और पिछले एक महीने से तनाव में रह रहे इन परिवारों के सदस्यों को चैन की सांस लेने का माहौल बनाना होगा जो वर्तमान में सभी तनावग्रस्त हो गए हैं।गांववासी प्रकाश, प्रेमपाल, लीला, संजय, सोहन सिंह, रीना, रामलाल, संजीव, सुमना, अनिल, सपना, रेलमा, रेणुका, शीला इत्यादि ने सरकार से मांग की है कि वे इन नोटिसों को रद्द करे और सभी परिवारों को इसके अलावा और ज़मीन उपलब्ध करवाये कियूंकि अब उनके परिवार बढ़ गए हैं और पहले वाली भूमि से उनका गुजारा नहीं हो रहा है।












