आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के सौजन्य से जोगिंदरनगर उपमंडल में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम पंचायत कुठेडा, पिपली, भडयाडा-बुहला, तैरम्बली और द्राहल से 75 स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करना और आपातकालीन परिस्थितियों में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
आपदा से बचाव के लिए दी जा रही अहम जानकारी
कार्यशाला के पहले दिन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के प्रशिक्षक एवं जिला समन्वयक अमरजीत सिंह ने आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने भूस्खलन, भूकंप और आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के उपायों पर प्रकाश डाला। साथ ही, सुरक्षित भवन निर्माण, सड़क सुरक्षा, बारिश के पानी के संचयन और पुन: उपयोग के तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। स्वयंसेवकों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का अभ्यास कराया गया, जिससे वे आपात स्थिति में जीवन बचाने में सक्षम हो सकें। इसके अलावा, जंगल की आग पर नियंत्रण पाने और समय रहते जंगलों को बचाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया गया। सड़क दुर्घटनाओं और सांप के काटने जैसी घटनाओं में स्वयंसेवकों की त्वरित प्रतिक्रिया कैसे होनी चाहिए, इस पर भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में नशे की बुराइयों के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया। प्रशिक्षकों ने युवाओं से अपील की कि वे समाज को नशा मुक्त बनाने में योगदान दें और आपदाओं से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहें। इस कार्यशाला का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाना और समाज में सुरक्षा एवं सतर्कता की भावना विकसित करना है।












