मजदूरों की आशाओं के विपरीत है सुक्खू का बजट-भूपेंद्र
सीटू मंडी ज़िला के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने आज विधानसभा में बजट प्रस्ताव को मज़दूरों की आशाओं व ज़रूरतों के विपरीत बताया है। बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मनरेगा मज़दूरों को अन्य मज़दूरों के बराबर दिहाड़ी पहले से ही नहीं दी जा रही है।उन्हें पूर्व में 100 रु कम दिया जा रहा है और इस बजट में भी वह अंतर बरकार रखा गया है और जहां अन्य मज़दूरों को 425 रु दिहाड़ी दी जायेगी लेक़िन मनरेगा मज़दूरों को 320 रु ही मिलेंगे जबकि काम करने के घण्टे सबके आठ ही हैं।इस प्रकार ग्रामीण मज़दूरों के साथ भेदभाव करने वाला बजट प्रस्ताव है। आत्मनिर्भर हिमाचल की बात करने वाले बजट में मजदूरों कर्मचारियों की बात केवल कामचलाऊ तरीके से बजट पुस्तिका के अंतिम पन्नों में की गई है जो सुखू सरकार की बजट की दिशा और मज़दूरों के प्रति उदासीनता को बताता है और सरकार के एजेंडे से मजदूर कर्मचारी गायब हैं। इस भारी महंगाई के दौर में मजदूरों की दिहाड़ी में केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी करना व इसे उपभोक्ता महंगाई सूचकांक के साथ न जोड़ना, मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में केवल 20 रुपए की बढ़ोतरी करना व उन्हें हिमाचल सरकार के न्यूनतम वेतन के दायरे में न लाना, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा कर्मियों के वेतन में केवल पांच सौ रुपए की बढ़ोतरी करना व माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनके लिए ग्रेच्युटी व न्यूनतम वेतन सुविधा लागू न करना, वाटर कैरियर, जल रक्षकों, मल्टी परपज़ वर्करज़, पैरा फिटर, पम्प ऑपरेटरों, चौकीदारों, राजस्व चौकीदारों, पंचायत वेटनरी असिस्टेंट के मासिक वेतन में भी मामूली बढ़ोतरी करना व उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन न देना उनके साथ क्रूर मज़ाक है। आउटसोर्स कर्मियों, सिलाई अध्यापकों, एसएमसी अध्यापकों, आईटी टीचर्स व एसपीओ के वेतन में नाम मात्र बढ़ोतरी करना व उनके लिए सरकार द्वारा कोई ठोस नीति न बनाना बेहद चिंताजनक है। औद्योगिक मजदूरों की 40 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी, श्रम कानूनों की पालना, उनके एसओपी व सुरक्षा नियमों पर यह बजट खामोश है। निगमों व बोर्डों की ओपीएस बहाली पर खामोशी खलने वाली है व सरकार की दस गारंटियों की वादा खिलाफी है। यह बजट मजदूरों कर्मचारियों के दुखों का निवारण करने वाला बजट नहीं है। आशा वर्करों के दिहाड़ी में मात्र दस रु की मामूली बृद्धि की गई है।अतः सीटू ने सरकार से इस प्रस्ताव में संशोधन करने और सभी के मानदेय व दिहाड़ी में वृद्धि की मांग की है।












