सहयोग स्पेशल स्कूल की बेटियों ने स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड विंटर गेम्स में लहराया परचम, भारत के लिए जीते 7 पदक
इटली में आयोजित स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड विंटर गेम्स 2025 में सहयोग स्पेशल स्कूल के तीन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए कुल 7 पदक जीते। इन खिलाड़ियों में निर्मला ने अल्पाइन्स स्कीइंग में 1 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल, जबकि राधा ने अल्पाइन्स स्कीइंग में 3 सिल्वर मेडल हासिल किए। वहीं, स्लो बॉडी बैंड में टीम इंडिया की ओर से भाग लेते हुए सहयोग स्कूल के तीन खिलाड़ियों ने 2 गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में आज 21 मार्च 2025 को निर्मला के गांव सचोट में भव्य रैली का आयोजन किया गया। रैली में तीनों विजेता बेटियों को गौहर पंचायत से रोड शो के रूप में पूरे क्षेत्र में घुमाया गया। इस दौरान सहयोग स्कूल के स्टाफ और स्थानीय ग्रामीणों ने भी रैली में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पंचायत के लोगों ने खिलाड़ियों का नोटों की माला, शॉल, टोपी और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया।
स्पेशल ओलंपिक भारत की ओर से कोच अनूप कुमार शर्मा और राजेश शर्मा ने इन खेलों में बच्चों का मार्गदर्शन किया। कोच अनूप के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने स्लो बॉडी बैंड में 2 गोल्ड मेडल जीते, जबकि कोच राजेश के नेतृत्व में अल्पाइन्स स्कीइंग में सहयोग की बेटियों ने 1 गोल्ड और 4 सिल्वर मेडल हासिल किए।
प्रधानमंत्री से भी की मुलाकात
स्पेशल ओलंपिक भारत के खिलाड़ियों की इस शानदार सफलता के बाद दिल्ली लौटने पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर भी मिला।
प्रोत्साहन राशि में वृद्धि
डॉ. मल्लिका नड्डा, जो स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्ष हैं, के प्रयासों से हिमाचल के विशेष बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिल रहा है। उन्होंने सरकार से स्वर्ण पदक विजेताओं की प्रोत्साहन राशि को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख, रजत पदक विजेताओं को ₹14 लाख और कांस्य पदक विजेताओं को ₹7 लाख करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सहयोग संस्था का आभार
सहयोग संस्था के संचालक डॉ. एन.के. शर्मा ने डॉ. मल्लिका नड्डा का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रयासों से ही सहयोग संस्था वर्ष 2002 से स्पेशल ओलंपिक भारत की जिला पार्टनर है। उन्होंने बच्चों के लिए प्रोत्साहन राशि में वृद्धि करवाने के लिए भी डॉ. नड्डा का धन्यवाद किया। यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल सहयोग स्पेशल स्कूल बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।












