14 वर्षों बाद सुंदरनगर में माता कामाक्षा के दर्शन, 105 किमी की पैदल यात्रा संग पहुंचेगा देवरथ
सुकेत रियासत की अराध्य देवी माता कामाक्षा काओ 14 वषोें के बाद अपने भक्तों को सुंदरनगर शहर में दर्शन देंगी। वर्षों से माता कामाक्षा के दरबार में पहुंचकर उन्हें सुंदरनगर बुलाने वाली मां कामाक्षा मेला कमेटी के सदस्यों को अपना आर्शीवाद देते हुए इस वर्ष अपनी स्नेहरूपी हामी भरी है। माता के इस आर्शीवाद से गदगद कमेटी के सदस्याें ने उनके स्वागत की जोरदार तैयारियां शुरू कर दी है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कमेटी के प्रधान उमेश कुमार गौतम ने बताया कि यह बड़े हर्ष और गर्व का विषय है कि मां कामाक्षा सुकेत के भक्तों का 14 वर्ष उपरांत आर्शीवाद देने के लिए सुंदरनगर शहर पहुंचेंगी। करसोग के काओ क्षेत्र से करीब 105 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित मंदिर से माता का रथ 27 मार्च को निकलेगा। दो दिनों तक लगातार पैदल चलने के बाद रथ हटगढ़ क्षेत्र के कोट में भक्तों को दर्शन देते हुए 29 मार्च को कामाख्या पैलेस धनोटू में रात्रि ठहराव करेंगी। यहां से 30 मार्च सुंदरनगर के लिए प्रस्थान करने के बाद 31 मार्च और पहली अप्रैल को नय मनाली बस स्टैंड सुंदरनगर के समीप रोपा में मनाली स्वीट के घर में ठहराव करने के बाद दो अप्रैल को सुकेत देवता मेले में शिरकत करेंगी। उन्होंने माता कामाक्षा को सुंदरनगर में लाने के लिए सुरेंद्र सेन और शिव सिंह सेन के साथ अन्य लोगों का भरपूर सहयोग रहा है।
माता कामाक्षा के साथ आएंगे नागदेव पुंड्रिक
माता कामाख्या के रथ के साथ अपने देवरथ पर सवार होकर देवनाग पुंड्रिक भी सुंदरनगर पहुंचेंगे। माता कामाख्या के रथ को यहां तक लाने के लिए 32 लोगों की टीम तैयार की गई है। जो बार-बार से रथ को उठाकर 105 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर यहां पहुंचेंगे। इसके लिए कमेटी द्वारा करीब 2.25 लाख रुपये का खर्च वहन किया जाएगा। जबकि उनके साथ आने वाले बंजतरियों का खर्च अलग से होगा।












