मई माह के प्रथम पखवाड़े में कृषि और पशुपालन के कार्यों की एडवाइजरी हुई जारी
कृषि विज्ञान केंद्र मंडी स्थित सुंदरनगर ने चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के निर्देशों पर मई माह के प्रथम पखवाड़े में किए जाने वाले कृषि एवं पशुपालन कार्यों की एडवाइजरी जारी की है। जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने कहा कि खरीफ मौसम में धान और मक्का प्रमुख खाद्यान्न फसलें हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे केवल अनुशंसित व क्षेत्रीय जलवायु के अनुरूप किस्मों का चयन करें। धान की गैर-बासमती किस्मों जैसे सुकारा धान, एचपी आर-1068, एचपीआर- 2143 तथा एचपीआर-2612 की नर्सरी 20 मई से 7 जून तक तैयार करें। वहीं, बासमती किस्म कस्तूरी बारामती की नर्सरी 15 मई से 30 मई तक बुआई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रति बीघा 2 से 2.4 किलोग्राम बीज पर्याप्त है। बिजाई पूर्व बीज को बैंविस्टिन दवा (2.5 ग्राम प्रति किलो बीज) से उपचारित करना जरूरी है, जिससे बीज जनित रोगों से सुरक्षा मिल सके। मक्का की बिजाई ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में 15 मई से जून के पहले सप्ताह और मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में 20 मई से 15 जून तक करें। मक्का के लिए बीज दर 1.6 किलोग्राम प्रति बीघा रखें और बिजाई कतारों में करें। मक्का को पशु चारे के रूप में भी उगाया जा सकता है, जिससे पशुओं के लिए साइलेज तैयार किया जा सकता है। इसके लिए अफ्रीकन टॉल किस्म का चयन करें और प्रति बीघा 4 किलोग्राम बीज की दर से बिजाई करें। उन्होंने कहा कि किसान अधिक जानकारी के लिए कृषि तकनीकी सूचना केंद्र एटिक के दूरभाष नंबर 01894-230395, किसान काल सेंटर नंबर 1800-180-1551 या किसान सारथी पोर्टल पर पंजीकरण कर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से सीधे संपर्क कर सकते हैं।
सब्जी उत्पादन को लेकर एडवाइजरी जारी
डॉ. पंकज सूद ने कहा कि क्षेत्र में फरवरी के अंतिम या मार्च के पहले पखवाड़े में की गई टमाटर, बेंगन, मिर्च, शिमला मिर्च तथा कद्दूवर्गीय फसलों की निराई-गुड़ाई करते हुए प्रति बीघा 3.2 से 4 किलो यूरिया खाद डालें और आवश्यकता अनुसार 7 से 8 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहे। वहीं मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में अभी इन फसलों की रोपाई नहीं हुई है तो शीघ्र रोपाई करें। उन्होंने कहा कि रोपण के समय टमाटर, बैंगन, मिर्च व शिमला मिर्च जैसी फसलों में प्रति बीघा 20 किटल सड़ी गोबर की खाद, 19 किलोग्राम 12-32-16 इफको और 2.3 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश खेत में मिलाएं। भिंडी की बिजाई कतारों में करें, जिसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। फ्रेंच बीन की उन्नत किस्में जैसे कंटेनर, पालम मृदुला, फाल्गुनी और अर्को कोगल की बुवाई भी इसी पद्धति से करें। कद्दूवर्गीय सब्जियों के लिए प्रति बीघा 8 क्विंटल गोबर की खाद, 12 किलोग्राम 12-32-16 इफको और 4.8 किलो पोटाश मिलाएं। मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी की अगेती किस्मों की पनीरी लगाने का यह उचित समय है।
पशु एवं मछली पालन को लेकर एडवाइजरी
डॉ. पंकज सूद ने कहा कि मई महीने में तापमान में उतार चढ़ाव से पशुओं में गर्मी से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है। पशुपालकों की चाहिए कि वे अपने पशुओं को गर्मी से बचाने के उपाय करें। पशुओं की नमक मिश्रण और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त मात्रा में गेहूं का भूसा और ज्वार चारा में दें। उन्होंने कहा कि गर्मी में खून चूसने वाले कीट और परजीवी की रोकथाम के लिए गौशालाओं की सफाई बनाए रखें और गोबर की नियमित जांच करवा कर डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाएं दें। इस मौसम में खुरपका मुंहपका, गलघोटू और ब्लैक कार्टर जैसे रोगों का टीकाकरण आवश्यक है। भेड़-बकरियों को एंटरोटोक्सिमिया और पीपीआर के खिलाफ टीका लगवाएं। मछली पालक किसान तालाब में पानी की गहराई 5 से 6 फीट बनाए रखें जिससे गर्मियों में सतही पानी के अत्यधिक गर्म होने पर मछलियों को ठंडे और सुरक्षित स्तर पर रहने की जगह मिल सके।












